सोलन। कालका-शिमला एनएच पर फोरलेन दूसरे चरण के कार्य में तेजी आएगी। डंपिंग साइटों के अभाव में धीमे पड़े कार्य में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की भूूूमि को इस्तेमाल की स्वीकृति दे दी है। चंबाघाट से कैथलीघाट तक वाकना, मठिया, स्टैग सहित अन्य नौ क्षेत्रों में डंपिंग कार्य किया जा सकेगा। इसकी पुष्टि डीएफओ सोलन श्रेष्ठानंद की है।
जानकारी के अनुसार कालका-शिमला एनएच पर फोरलेन का प्रथम चरण का 95 प्रतिशत कार्य करीब पूरा हो गया है। इसके बाद चंबाघाट से कैथलीघाट तक दूसरे चरण का कार्य किया जा रहा है। इस बीच पहाड़ों की कटिंग की जा रही है लेकिन पहाड़ियों से निकलने वाले मलबे को ठिकाने लगाने की उचित जगह फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी के पास नहीं थी। इय कारण यह कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा था। एनएच पर डंपिंग के लिए एनएचएआई ने वन विभाग के माध्यम से प्रस्ताव भेजा था। अब इस प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है।
डंपिंग के लिए नौ क्षेत्रों को चयनित किया गया है। यहां अब फोरलेन निर्माता कंपनी मक डंप कर सकेगी। इससे कटिंग के कार्य में भी तेजी आएगी। इसके अलावा फोरलेन निर्माण में प्रस्तावित कई अन्य साइटों को भी एफसीए की अनुमति मिली है। माना जा रहा है कि फोरलेन के द्वितीय चरण के काम में तेजी आएगी।
महाप्रबंधक एरिफ इन्फ्रा दीपक सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से मक डंपिंग की मंजूरी मिलने से कार्य में तेजी आएगी। कई क्षेत्रों में कटिंग कार्य चला हुआ है लेकिन डंपिंग क्षेत्र के अभाव से कार्य सुचारु रूप से नहीं हो रहा था।