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छोटे बच्चे पढ़ाई में अच्छे, अक्षर ज्ञान में रह गए थोड़े कच्चे

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सोलन प्राथमिक पाठशाला में पढ़ाई करते विद्यार्थी। संवाद - फोटो : SOLAN
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। कोविड के बीच करीब दो वर्षों से छोटी कक्षाओं के स्कूल पूर्ण रूप से बंद रहे हैं। इस बीच बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के साथ परीक्षा देकर तीसरी कक्षा तक पहुंच गए लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई से अक्षर ज्ञान में कच्चे रह गए। अब तीसरी को बोर्ड कक्षा घोषित कर दिया है लेकिन अधिकतर बच्चों को अक्षर ज्ञान ही नहीं है।
हालांकि अभिभावक और अध्यापक बच्चों को सक्षम बनाने के नए प्रयास कर रहे हैं। रोजाना विद्यार्थियों को होमवर्क के साथ एक पेज सुलेख का लिखने के लिए दे रहे हैं। कोविड के बीच प्रार्थना सभा बंद है।
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इस समय में कक्षाओं में ही बच्चों को अक्षरों का ज्ञान, पहाड़े समेत अन्य कविताएं लिखने और बोलने की प्रतियोगिताएं करवाई जा रही हैं। इससे बच्चे आसानी से सीख रहे हैं। अमर उजाला ने कोविड के शिक्षा पर प्रभाव का जायजा लेने के लिए अभिभावकों और अध्यापकों से भी चर्चा की।
छोटी उम्र में ही लग गई थी फोन की लत
अध्यापक घनश्याम शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई से विद्यार्थियों का मन भर गया था। छोटी उम्र में ही बच्चों को मोबाइल मिलने से वह उन्हें इसकी लत लग गई थी। ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थी बाहर खेलते भी रहे लेकिन शहरी क्षेत्र में विद्यार्थी कमरे में कैद होकर मोबाइल पर चिपक गए थे। स्कूल खुलने से विद्यार्थी दोस्तों के साथ पढ़ाई और मस्ती कर खुश हैं।
बच्चों को मनोरंजन के साथ करवाई पढ़ाई
अध्यापक कृष्णा नेगी ने कहा कि कोविड दौर में भी विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के साथ उनका मनोरंजन भी करवाया। ऑनलाइन डांस, संगीत समेत चित्रकला जैसी प्रतियोगिताएं भी करवाई गईं। शुरूआत में कुछ ही विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा ले सकें जिसका मुख्य कारण स्मार्ट फोन भी रहा। कोविड के एक साल बाद भी स्कूल नहीं खुलने पर सभी बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से जुड़ गए। स्कूल खुलने पर बच्चे कक्षाओं में शिक्षा ग्रहण करने से खुश हैं।
अक्षरों का ज्ञान कम, लिखावट भी हो गई खराब
अध्यापक शालिनी भंडारी ने कहा कि कोविड के बीच दो वर्ष में बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई के साथ परीक्षा भी दी। इस बीच ऑनलाइन परीक्षा से वह अगली कक्षाओं में तो पहुंच गए। अब स्कूल खुलने के बाद ऑफलाइन कक्षाओं में उन्हें अक्षरों के ज्ञान में परेशानी झेलनी पड़ रही है। कोविड में तीसरी के बच्चों की लिखावट भी खराब है। इसे सुधारने के लिए उन्हें होमवर्क के साथ सुलेख लिखने के लिए दिया जा रहा है। धीरे-धीरे बच्चों के अक्षर ज्ञान और लिखावट में सुधार आ रहा है।
ऑनलाइन पढ़ाई से छोटे बच्चे रहे परेशान
अध्यापक जया मैनी ने कहा कि कोविड के बीच सभी बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। इसमें छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को भी ऑनलाइन पढ़ाई में थोड़ी मुश्किल झेलनी पड़ी है। स्कूल खुलने पर बच्चों के रूटीन टेस्ट लिए तो उनमें लिखने की आदत छूट गई है। जब से स्कूल खुले हैं, इस क्षति को पूरा करने पर काम किया जा रहा है। बच्चे कक्षाओं में बोर न हो, इसके लिए बीच-बीच में 15-15 मिनट का ब्रेक दिया जा रहा है।
घर पर ही रखना पड़ रहा था फोन
अभिभावक लक्ष्मण ठाकुर ने बताया कि घर पर सिर्फ उनके पास ही स्मार्ट फोन है। कोविड के बीच बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर न पड़े इसके लिए फोन ऑनलाइन कक्षा के लिए घर पर ही रखना पड़ था। बच्चों को भी फोन की लत लग गई थी। कक्षाएं न होने पर भी वह फोन की मांग करते रहे। लेकिन अब स्कूल खुलने के बाद उनकी मोबाइल की आदत भी खत्म हो गई है।
ऑनलाइन कक्षा से बच्चे भी बने स्मार्ट
अभिभावक अंजना ने बताया कि स्मार्ट फोन पर बच्चों की कक्षाएं लग रही थीं। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के साथ मोबाइल के भी मास्टर बन गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें मोबाइल के बारे में कई चीजों के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन बच्चे मोबाइल से फोटो डाउनलोड करना, भेजना समेत गूगल पर कई जानकारी चुटकी में जुटा देते है। स्कूल खुलने के बाद दिन के समय तो फोन से छुटकारा मिल गया है लेकिन रात के समय बच्चे फोन लेने की जिद्द करते हैं।
कोविड को भूलाकर रोज बच्चों को भेजती हूं स्कूल
अभिभावक मनसा ने बताया कि कोविड के बीच उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी थी लेकिन ऑनलाइन कक्षाएं शुरू होने से बच्चों ने फिर पढ़ाई शुरू कर दी। कोविड में स्कूल खुलने पर उन्हें सुरक्षा को लेकर भय होने लगा। स्कूल में अध्यापकों के प्रयास और जागरूक करने पर अब वह कोविड को भूलकर पहले की तरह बच्चों को रोज स्कूल भेज रही हैं।
समय पर सोते और उठते हैं बच्चे
अभिभावक रितू ने कहा कि कोविड के बीच बच्चों की पूरे दिन की दिनचर्या खराब हो गई थी। सुबह उठने और रात को सोने का समय भी बदल गया था। बच्चे सुबह अपनी मर्जी से उठने के साथ खाना खाते थे। अब स्कूल खुलने के बाद दोबारा से पहले की तरह स्थिति हो गई है। बच्चे बिना आनाकानी किए रोज स्कूल जा रहे हैं।
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बच्चों को मजबूत बना रहे अध्यापक
केंद्र पाठशाला सोलन की प्रभारी सरिता शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चे पहले की तरह रुचि नहीं दिखा रहे थे। इसलिए बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के साथ मनोरंजन भी पढ़ाई के साथ शुरू किया। स्कूल खुलने पर अध्यापक बच्चों को कोविड से मुकाबला करने के लिए मजबूत बना रहे हैं। उन्हें स्वच्छता के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। अब बच्चों ने उसे अपनी दिनचर्या बना दिया है। इसमें हाथ धोना, सामाजिक दूरी समेत मास्क का प्रयोग मुख्य हैं।
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