जिला शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रबंधकों को दिए निर्देश
हर बुधवार बच्चों को मिलेगा फल या अंडा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के स्कूलों में मिड-डे मील (एमडीएम) और मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना के रिकॉर्ड को लेकर अब कड़ाई बरती जाएगी। जिला शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे दोनों योजनाओं के खर्च का लेखा-जोखा अलग-अलग तैयार करें। यह निर्देश विभाग की ओर से किए जा रहे निरीक्षणों के दौरान सामने आई अनियमितता के बाद जारी किए गए हैं। निरीक्षण में पाया गया कि कई स्कूल दोनों योजनाओं के फंड का रिकॉर्ड एक साथ मिलाकर बना रहे थे, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही थी। जानकारी के अनुसार, प्री-प्राइमरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चों को एमडीएम के साथ मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना के तहत फल भी दिए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार स्कूलों को अलग से बजट मुहैया करा रही है। स्कलों में सप्ताह में एक बार, यानी बुधवार को सभी विद्यार्थियों को फल या अंडा देना अनिवार्य है। अगर बुधवार को कोई अवकाश होता है, तो यह डाइट अगले दिन प्रदान करनी होगी।विद्यार्थियों को सात रुपये की पौष्टिक डाइट प्रदान की जा रही है, जिसका रिकॉर्ड रखना आवश्यक है। विभाग ने स्कूलों को जारी अधिसूचना में कहा है कि उन्हें ताजा और मौसमी फलों की ही खरीद करनी होगी। योजना के तहत फंड ब्लॉक स्तर पर प्रदान किया जा रहा है, जिसे बीईओ की ओर से स्कूलों को वितरित किया जा रहा है। सभी स्कूलों को महीने में एक बार दोनों योजनाओं के क्रियान्वयन और खर्च की रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा उपनिदेशक को सौंपनी होगी।
कोट
शिक्षा निदेशालय की ओर से स्कूलों में मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना के तहत फल और अंडा वितरित किए जा रहे हैं। सभी स्कूलों को दोनों योजनाओं के रिकॉर्ड को पृथक रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि योजनाओं का उचित हिसाब रखा जा सके।
राजकुमार पराशर, जिला नोडल अधिकारी, मिड-डे मील