लंबे अरसे से चल रही शामती बाइपास मार्ग के निर्माण की शहरवासियों की मांग जल्द पूरी होने वाली है। इस मार्ग का निर्माण शुरू हो गया है। यह मार्ग बाइपास के पास आंजी से निकलना है और राजगढ़ मार्ग पर शामती के पास मिलेगा। लिहाजा नौणी, राजगढ़, सिरमौर से चंडीगढ़ या शिमला आदि आने जाने के लिए अब मालरोड और सर्कुलर से वाहन लेकर आने की जरूरत नहीं। सीधे शामती से बाइपास फोरलेन को रास्ता मिलेगा।
एक अनुमान के मुताबिक राजगढ़ जाना है तो बाईपास बनने के बाद कम से कम आधा घंटे का सफर कम होगा। इसमें बड़े माल वाहक वाहन जिनकी वजह से शहर में जाम की सबसे अधिक समस्या बनी रहती है, यह सब वाहन बाईपास से ही जाएंगे। दो साल के भीतर इस मार्ग को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अधीक्षण अभियंता बीके शर्मा ने कहा कि शामती बाइपास का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
5 किमी लंबा मार्ग : शहर में जाम होगा कम
आंजी से शामती तक साढ़े पांच किमी बनने वाला मार्ग लोगों को जहां जाम से निजात दिलवाएगा वहीं इससे लोगों के समय में भी काफी बचत होगी। इस मार्ग पर नौणी समेत कई निजी संस्थानों के अलावा उद्योग भी हैं। वर्तमान में राजगढ़, नौणी, ओच्छघाट और यशंवतनगर जाने के लिए सोलन के आसपास कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। कुमारहट्टी बाईपास से है लेकिन वह दूर पड़ता है। लिहाजा इस मार्ग के बनने से ट्रैफिक सीधे डायवर्ट होगा जिससे यातायात की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी।
29 करोड़ से बनेगा सड़क मार्ग
अधिग्रहण और प्रभावितों को मुआवजा दिया जा चुका है। फाइनल फंडिंग अप्रूवल न मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। अब वर्तमान वित्त वर्ष में नाबार्ड से फाइनल फंडिंग की अप्रूवल जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। प्रस्तावित बाईपास का निर्माण 29 करोड़ से होना है। इससे शहर में यातायात के बढ़ते विकराल दबाव और प्रतिदिन लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिलेगी। लिहाजा लोग भी बड़ी बेसब्री से इस निमार्ण का इंतजार कर रहे थे।
बागवानों को भी मिलेगी राहत
सिरमौर, शिमला, अपर शिमला के बागवान भी इस मार्ग से बाहरी राज्यों की मंडियों के लिए अपने उत्पाद भेज सकते हैं। यह मार्ग राजगढ़, शिमला और कुफरी को भी जोड़ता है। इसमें वाया गौड़ा होते हुए चायल-कुफरी से शिमला और अपर शिमला के लिए बागवान इस बाइपास मार्ग का लाभ उठा सकते हैं।
बाईपास के लिए कटेंगे करीब 400 पेड़
जहां एक ओर बाईपास बनने से लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं इसके लिए 300 से 400 पेड़ों की बलि दी जाएगी। इसके लिए वन विभाग से इसकी परमिशन लेकर वन विभाग को 38 लाख का मुआवजा भी अदा कर दिया गया है।