कोलेस्ट्रॉल को काबू करने वाली टैबलेट समेत एंटीबायोटिक की डोज के दो सैंपल फेल हो गए हैं। यह सैंपल अधोमानक निकले हैं। दोनों दवाओं का निर्माण सोलन और सिरमौर जिले में हुआ है। इस बैच की दवाएं मर्ज के लिए कम असरदार होंगी। यह खुलासा सीडीएससीओ ने अप्रैल, मई के ड्रग अलर्ट में किया है।
तीन जून को जारी इन दवाओं के बैच नंबर और कंपनियों के नाम केंद्रीय विभाग ने सार्वजनिक किए हैं। लिहाजा, इन बैच वाली दवाओं का कोई मरीज सेवन कर रहे हों या चिकित्सक यह दवाएं लिख रहे हों तो सावधान हो जाएं। इस बैच पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया है। इसकी सूचना थोक और परचून दवा विक्रेताओं को जारी कर दी है।
तीन माह में 12 सैंपल फेल
फरवरी और मार्च में औद्योगिक क्षेत्र के जिला सोलन के विभिन्न क्षेत्रों में बनने वाली 12 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। इन बैच की बिक्री पर सख्ती से पाबंदी लगाई है। क्षेत्र में बद्दी, बरोटीवाला और कसौली में बनने वाली दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं। इन दवाइयों में एंटीबायोटिक अमोक्सीलीन और अन्य दवाइयों में सिनेकोल्ड, इमोलेक्स प्लस, अट्रोपोल, सिफजोन आदि शामिल हैं।
सबसे अधिक एंटिबायोटिक दवाएं हैं शामिल
सबसे अधिक एंटीबायोटिक के सैंपल फेल हुए हैं। तीन माह में हिमाचल से लिए गए सैंपल में फेल दवाओं में 70 फीसदी एंटीबायोटिक ही हैं। सभी दवाओं का उत्पादन सोलन या सिरमौर में हुआ है। दवाओं की गुणवत्ता सही न होने से दवाओं का निर्माण हाशिये पर है। लिहाजा समय समय पर ड्रग्स विभाग टेस्टिंग को अंजाम देता रहता है।