संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। वन मंडलाधिकारी यशुदीप सिंह ने कहा कि नालागढ़ में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वन मंडल नालागढ़ के तहत सभी ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आमजन को आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों स्वयंसेवी संस्थाओं और नंबरदारों को आगजनी की घटनाओं के रोकथाम के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त वन प्रचार मंडल शिमला से भी इस विषय में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लोगों को बताया जा रहा है कि बिना वन परिक्षेत्र अधिकारी की स्वीकृति के निजी खेत या घासनी में आग लगाना मना है। उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति से 1500 रुपये प्रति बीघा की दर से जुर्माना वसूला जाएगा।
आग लगने की संभावनाओं के चलते वन मंडल नालागढ़ के अंतर्गत कई जंगली क्षेत्रों को वर्गीकृत किया गया है जिनमें 13 जंगली क्षेत्र उच्च संवेदनशील, 36 मध्यम संवेदनशील और 50 जंगली क्षेत्र कम संवेदनशील हैं। इस वर्ष जिला सोलन में 30 हेक्टेयर भूमि पर चीड़ के पेड़ के जंगलों में चौड़ी पत्ती वाले पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं जो गर्मियों में हरे-भरे होने के कारण जंगलों को आग से बचाने में सहायक होंगे।
उन्होंने क्षेत्र के ग्रामीणों से आग्रह किया है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए जंगली क्षेत्रों के आसपास सूखी पत्तियों को हटाएं। सिगरेट या बीड़ी का इस्तेमाल करने के बाद जंगल में न फेंके और आग की सूचना दूरभाष 01795-223124 पर दें। उन्होंने कहा कि जंगल या आसपास आग लगाने के दोषी को सात वर्ष तक कारावास और 25 हजार तक जुर्माना किया जा सकता है।