नालागढ़ के मितियां पंचायत में सूख से खराब हुई गेहूं की फसल। संवाद
बद्दी (सोलन)। नालागढ़ और दून की पहाड़ी पंचायतों में बारिश न होने से गेहूं की फसल सूख गई है। इसके चलते पशुचारे की समस्या पैदा हो गई है। करीब चार दर्जन पंचायतों में रबी की फसल सूखे से नष्ट हो गई है। इन पंचायतों में किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते है, लेकिन बारिश न होने से अब चारे की भी परेशानी हो गई है।
बीबीएन में 11,000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल बीजी गई है, इसमें से 75 फीसदी फसल बारिश पर निर्भर है। लेकिन इस बार सर्दियों में बारिश बहुत कम हुई जिसके असर यह दिखा है कि बीबीएन का पहाड़ी क्षेत्र इस बार सूखे की चपेट में आ गया है। यहां पर गेहूं और अन्य फसलें पूरी तरह से सूख गई हैं। गेहूं के भूसे को किसान करीब छह माह तक पशुचारे में उपयोग करते हैं, मगर गेहूं सूखने से अब भूसा भी नहीं मिल पाएगा। डूमनवाला गांव के किसान अमर सिंह ठाकुर, सोढी राम, मुकेश कुमार ने बताया कि इस बार सिंचित क्षेत्रों में भी फसल ठीक नहीं है। बारिश से जो बात बनती है वह इस बार मैदानी क्षेत्र में भी नहीं दिख रही है। पानी लगने से बिजली खर्च से उत्पादन लागत बढ़ गई है। अब गेहूं की फसल पानी मांग रही है। अगर किसान पानी लगाता है तो भी नुकसान है और नहीं लगाता है तो फसल समय से पहले सूख जाएगी। पानी लगाने के बाद अगर हवा चलती है तो गेहूं खराब होने का खतरा बना हुआ है।
नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्र मितियां के तेजपाल चौहान, नानक चंद, सरोर के प्रधान धर्मपाल चंदेल, कोईड़़ी की प्रधान गंगो देवी, रामशहर की प्रधान कृष्णा देवी, बायला की रजना, साई के मेहर चंद, चमदार के कर्मचंद, लूसन की सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बारिश न होने से उनकी गेहूं समय से पहले सूख गई है और बहुत कम उत्पादन हुआ है। पहले अच्छी गेहूं होने से भूसे के रूप में पशुचारा हो जाता था लेकिन इस वर्ष गेहूं नहीं होगी तो चारा कहां से आएगा।
उधर, कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष सर्दियों में कम बारिश होने से पहाड़ी क्षेत्र में गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। वहीं, मैदानी क्षेत्र में बारिश न होने से फसल प्रभावित हुई है।