संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन/नालागढ़। जिले में एनएचएम अनुबंध कर्मियों की पेन डाउन स्ट्राइक शुरू हो गई है। इससे पहले ये कर्मी काले बिल्ले लगाकर कार्यालय में कार्य कर रहे थे। दो फरवरी से मांगों को लेकर कामकाज छोड़ दिया है। इससे जिले में कई कार्य प्रभावित होगा। कर्मचारियों के हड़ताल पर नालागढ़ में स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।
जानकारी के अनुसार जिले में 100 एनएचएम अनुबंध कर्मी हैं। ये सभी कर्मी स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न कार्यक्रम में कार्य कर रहे है। कोविड टीकाकरण और कोविड सैंपलिंग में भी कर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन 19 वर्षों के बाद भी विभाग की ओर से पक्का नहीं किया गया है। इसे लेकर कर्मी पिछले काफी समय से रोष व्यक्त कर रहे हैं और पक्का करने की मांग कर रहे हैं।
संघ के मुख्य सलाहकार देशराज के नेतृत्व में प्रीति, नागेंद्र, सीमा, अजीत, राकेश, किरण, शीतल, मोनू, सुमन, डॉ. डेलमीटा, सोनम, डॉ. निशांत व रीना ने अस्पताल परिसर में सरकार और विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले 23 सालों से वह विभाग ने सेवाएं दे रहे हैं लेकिन अभी तक सरकार ने उनके लिए कोई पॉलिसी तैयार नहीं की है। एड्स सोसायटी के कर्मचारी 22 सालों से अनुबंध पर है। जब तक सरकार का काई निर्णय नहीं आता है तो संघर्ष जारी रहेगा।
मुख्य सलाहकार देशराज ने कहा कि प्रदेश के भीतर स्टेट एजुकेशन सोसायटी (एसएसए) की तर्ज पर स्टेट हेल्थ सोसायटी को एड्स के कर्मचारियों को राहत दी जाए अन्यथा उन्हें संघर्ष के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इससे काफी लोगों को सेवाएं बाधित होंगी। इसके लिए सरकार व विभाग जिम्मेदार होगा।
एनएचएम अनुबंध कर्मचारी संघ सोलन की अध्यक्ष शशी ने बताया कि वह 17 वर्षों से एनएचएम के तहत कार्य कर रही है। अभी तक सरकार की ओर से कई ध्यान नहीं दिया गया है। पहले भी कई बार कर्मियों की ओर से बताया जा चुका है और कर्मियों को पक्का करने के लिए 2016 में अधिसूचना जारी की गई।
यह केवल कागजों तक ही सीमित रही। अब 2016 से अब तक पे-स्केल भी नहीं दिया जा रहा है और अब तक बीस हजार वेतन में परिवार चलाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में कार्य करने के बावजूद उन्हें स्वास्थ्य कर्मी नहीं गिना जाता है। इसके चलते अब वह सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल बैठे हैं।