नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी पर लोगों ने चिंता जताई है। नालागढ़ में केंद्र सरकार ने ट्रॉमा सेंटर खोलने की घोषणा तो की है लेकिन अभी तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है। आए दिन लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और समय पर उपचार नहीं मिलने से दम तोड़ रहे हैं। यूं तो नालागढ़ में 100 बेड का अस्पताल है लेकिन यहां उस हिसाब से डॉक्टर और अन्य स्टाफ नहीं है। यहां पर तीन सौ से चार सौ मरीज प्रतिदिन ओपीडी में आते हैं।
मरीजों की संख्या के हिसाब से डॉक्टर नहीं है। लोगों को मजबूर होकर निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है। लोगों को बाहर से मंहगे दाम पर अल्ट्रासाउंड कराने पड़ रहे हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं को दिक्कत हो रही है। नेत्र रोग, बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया का डॉक्टर भी नहीं है। इससे यहां ऑपरेशन वाले रोगियों को पीजीआई रेफर किया जा रहा है। प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होने से यहां पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ट्रॉमा सेंटर खोलने की घोषणा की थी। यह घोषणा मात्र कागजों में ही सिमट कर रह गई है।
यहां आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होते हैं जिन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा। स्थानीय विधायक लखविंद्र सिंह राणा ने इन प्रश्नों की विधानसभा में उठाया जिस पर सरकार ने उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। राणा ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के लिए लोनिवि ने 64 लाख 11 हजार रुपये का प्राक्कलन तैयार कर स्वास्थ्य निदेशक को भेज दिया है। जल्द ही इस पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, बीएमओ डॉ. केडी जस्सल ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट ने कार्यभार संभाल लिया है। अब अल्ट्रासाउंड भी यहीं पर होंगे। नेत्र और बालरोग डॉक्टरों के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है।