दुग्ध उत्पादकों सहकारी सभाओं ने दूध के दाम बढ़ाने की मांग की है। संघ का कहना है कि दुग्ध खरीद केंद्रों में पशुपालकों से 22 से 25 रुपये प्रतिलीटर के हिसाब दूध खरीदा जा रहा है। पंजाब और हरियाणा से आ रहा अशुद्ध दूध 46 रुपये प्रति लीटर शहर में बिक रहा है। लिहाजा पशुपालकों को पंजाब और हरियाणा के बराबर कीमतों पर खरीद की जाए। इन मांगों को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने सोलन उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि अगर सरकार ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन करके राज्य सरकार को ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने वालों में नंदलाल ठाकुर, ओम प्रकाश, खुशीराम परिहार, देवराज शर्मा, अमर सिंह, देवेंद्र ठाकुर, अभिषेक ठाकुर, प्रमोद अत्री और विजय ठाकुर ने कहा पंजाब के दूध की गारंटी नहीं है।
यह भी खुलासे हुए हैं कि दूध में यूरिया और अन्य सामान मिलाया जाता है। लोगों को यही दूध 46 रुपये प्रतिलीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है। स्थानीय लोगों से किसानों द्वारा शहर में पहुंचाया जा रहा दूध काफी शुद्ध है। लेकिन गांव में सरकार द्वारा खोले गए कलेक्शन केंद्रों में पंजाब से आने वाले दूध की आधी कीमत भी नहीं दी जा रही है। लिहाजा प्रतिनिधि मंडल ने सरकार से मांग की है कि किसानों का दूध 46 रुपये प्रतिलीटर खरीदा जाए।
मवेशियों का खर्चा तक नहीं निकल रहा
पशुपालकों ने कहा कि उचित दाम न मिलने से दुग्ध उत्पादक मवेशियों का खर्चा तक नहीं निकाल पर रहे। यदि दूध की कलेक्शन सेंटरों में कीमत बढ़ती हैं तो दूसरे किसान और पशुपालक जो अभी दुग्ध उत्पादन नहीं कर रहे हैं, उन्हें भी प्रोत्साहन मिलेगा। तभी प्रदेश दूध के मामले में आत्मनिर्भर होगा और पंजाब-हरियाणा से अशुद्ध दूध भी बंद हो सकेगा।