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सरकारी स्कूलों में मिड डे मील का संचालन मुश्किल

Thu, 08 Dec 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो, सोलन
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जिला सोलन के करीब 1075 स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन मिड डे मील पर खतरा मंडरा रहा है। - फोटो : demo pic
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जिला सोलन के करीब 1075 स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन मिड डे मील पर खतरा मंडरा रहा है। तिमाही चावल का पर्याप्त कोटा न मिलने से कई स्कूलों में चावल खत्म हो चुके हैं। कुछ स्कूलों में एक दो दिन का कोटा ही बचा है। ऐसे में स्कूलों में इस केंद्रीय योजना का संचालन मुश्किल हो रहा है। स्कूलों में प्रति विद्यार्थी चावल का कोटा तय किया जता है। लेकिन कई स्कूलों में महज पचास फीसदी ही चावल मिल सका है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चावल का कोटा खाद्य आपूर्ति निगम जारी करता है। लेकिन इस बार रीलिज आर्डर लेट होने के कारण जिला के स्कूलों में यह हालत बनी हुई है। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक डॉ. चंद्रेश्वर शर्मा ने माना कि स्कूलों में चावलों का पर्याप्त कोटा नहीं पहुंचा है। खाद्य आपूर्ति निगम के तहत कोटा जारी होता है। लेकिन अब समस्या लगभग समाप्त होने वाली है। चावल का कोटा जारी किया जा रहा है। कुछ स्कूलों का पूरा कोटा जारी भी कर दिया है। शेष को किया जा रहा है।
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खिचड़ी पकाना हो गया मुश्किल
जौणाजी के कनाह स्कूल के मुख्याध्यापक मनोहर सिंह ने बताया कि चावल का त्रैमासिक कोटा स्कूलों के लिए जारी होता है। इस बार यह कोटा बेहद कम मिला। सिर्फ 45 दिन के गुजारे लायक चावल मिला था। वह अब खत्म हो गया है। डिपुओं से भी चावल नहीं मिल पा रहा। ऐसे में बच्चों को बिना चावल के मिड डे मील योजना का संचालन करना मुश्किल हो गया है।

उधार में चलाया जा रहा काम
कोटला स्कूल के मुख्याध्यापक पद्मदेव चौधरी ने कहा कि स्कूलों में चावल का कोटा पर्याप्त नहीं है। अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर माह का कोटा काफी कम मिला है। ऐसे में मिड डे मील का संचालन मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि उधार लेकर चावल बनाए जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को दिक्कतें हो रही हैं।

इसलिए स्कूलों में चावल का संकट
चावल का तीन माह का कोटा एक साथ मिलता है। प्रति छात्र 100 ग्राम के हिसाब से चावल दिया जाता है। जिला के स्कूलों में अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर का कोटा अक्तूबर में ही उठाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि रीलिज आर्डर सही समय पर न कटने से जिला के स्कूल में आधा अधूरा ही कोटा आवंटित हो सका है। ऐसे में शिक्षकों को अपनी जेब से पैसे देकर चावल खरीदकर मिड डे मील का संचालन करना पड़ रहा है।
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किन ब्लॉकों में कितने स्कूल योजना से लाभान्वित
अर्की    119
धर्मपुर   181
धुदन    119
कंडाघाट 162
कुठाड़   171
नालागढ़  172
रामशहर  151
      
यह है योजना
उच्च प्राथमिक स्कूलों में दोपहर का खाना बच्चों को मुफ्त दिया जाता है। मध्यान्ह भोजन योजना भारत सरकार तथा राज्य सरकार के समवेत प्रयासों से संचालित है। केंद्र सरकार ने यह योजना 15 अगस्त 1995 को लागू की। इसके तहत कक्षा एक से पांच तक प्रदेश के सरकारी/परिषदीय/राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी बच्चों को 80 प्रतिशत उपस्थिति पर प्रतिमाह 3 किलोग्राम गेहूं अथवा चावल दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। एक सितंबर 2004 से पका पकाया भोजन प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराए जाने की योजना आरंभ कर दी। अक्तूबर 2007 से इसे शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ब्लॉकों में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा अप्रैल 2008 से शेष ब्लॉकों एवं नगर क्षेत्र में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक विस्तारित कर दिया गया।
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