फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैठने को नहीं बेंच, फर्श पर बैठे नन्हें मरीजों में संक्रमण का खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल के डी-ब्लॉक में बैठने के लिए जगह की कमी खल रही है। अस्पताल के शिशु वार्ड में बैठने के लिए बेंच तक नहीं लगे हैं। वार्ड में फर्श पर बैठे बच्चों और उनकी माताओं में संक्रमण का खतरा सता रहा है।
इस कारण अस्पताल में मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। डी-ब्लॉक में मरीजों की अधिक भीड़ होने पर मरीजों को फर्श पर ही बैठना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ती है। यहां पर गायनी के साथ-साथ शिशु रोग ओपीडी भी है जिसके बाहर भी ऐसा ही हाल देखने को मिल रहा है।
विज्ञापन

शनिवार को भी शिशु रोग ओपीडी के बाहर इसी प्रकार का हाल रहा। महिलाएं मजबूरी में बच्चों को लेकर फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करतीं नजर आईं। यहां पर ओपीडी में बारी आने में एक घंटे तक का समय लग रहा था।
बैठने की व्यवस्था न होने से महिलाओं और बच्चों को दिक्कतें आ रही थी। अस्पताल प्रशासन की मानें तो जगह की कमी के चलते ओपीडी के बाहर बेंच नहीं लग पा रहे हैं। मरीजों को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ती है।
स्त्री रोग समेत शिशु रोग और महिला सामान्य चिकित्सक ओपीडी में आजकल काफी भीड़ उमड़ रही है। तीन से 12 साल आयु तक के बच्चों में वायरल फैलने के कारण शिशु रोग की ओपीडी रोजाना 150 के आसपास पहुंच रही है।
साथ ही गायनी की ओपीडी 120 और महिला सामान्य ओपीडी में संख्या 100 तक पहुंच रही है। रोज यहां पर इतनी भीड़ हो जाती है कि मरीजों के खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी के बाहर बेंच तो लगाए हैं लेकिन मरीजों की संख्या के आगे यहां पर लगे बेंच नाकाफी हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
विज्ञापन

अन्य जगहों पर भी लगाए जाएंगे बेंच
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल वर्मा ने बताया कि ई-ब्लॉक में जगह कम है। ओपीडी के बाहर बेंच लगाए गए हैं। इसी के साथ लेबर रूम को जाने वाले रास्ते में भी बेंच की व्यवस्था है। कई अन्य जगहों पर बेंच लगाए जा रहे हैं। मरीज टोकन लेकर बेंच पर बैठें और बारी आने पर ही ओपीडी में जाएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें