अर्की (सोलन)। कंक्रीट के पक्के मकान की चाह में मिट्टी के बने घर लुप्त हो रहे हैं। आधुनिकता की दौड़ में लोग कंक्रीट के मकानों पर लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं लेकिन पुरानी शैली से बनने वाले कच्चे मकान कम नजर आ रहे हैं।
हालांकि कुछ जगह आज भी बड़ी मशक्कत से मिट्टी से सुंदर मकान बनाए जा रहे हैं। दरअसल इन मकानों को बनाने के लिए विशेष औजारों की आवश्यकता पड़ती है जो आजकल मिलना बहुत कठिन होता जा रहा है।
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उपमंडल अर्की में एक मिट्टी का मकान बनता दिखा तो उसे कैमरे में कैद कर लिया और वहां काम कर रहे मजदूरों से बात भी की। ऐसे मकान बनाने का तजुर्बा रखने वाले 65 वर्षीय शंकर ने बताया कि मिट्टी के मकान को तैयार करने के लिए काफी दिनों पहले मिट्टी को भिगोना पड़ता है।
मिट्टी नरम पड़ने के बाद इसका इस्तेमाल किया जाता है। उसके बाद दो लकड़ी के फट्टों को दोनों और रखकर उसके बीच मिट्टी डालकर उसे मूंगरी (लकड़ी का बना औजार) से कूट कर दीवार बनती है जिसे भीत कहा जाता है। इस निर्माण में और भी कई औजार होते हैं जिनका मकान बनाने में इस्तेमाल होता है।
यहां काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि ऐसे मकानों से गर्मियों के समय ठंडे तथा सर्दियों के समय में गर्म होते हैं। मजदूरों ने बताया कि ऐसे मकान अब बहुत ही कम बनाए जा रहे हैं। लोग पक्के मकानों के निर्माण को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं लेकिन कई जगह आज भी लोग ऐसे मकानों को बना रहे हैं। हालांकि आजाकर ज्यादातर कच्चे मकानों को गोशाला के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। (संवाद)