जानकारी के अनुसार आरोपी से पूछताछ के दौरान उसे हथकड़ी लगी हुई थी। टीम ने मौके पर ही सिस्टम और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की और यह समझने की कोशिश की कि फर्जीवाड़े में डिजिटल स्तर पर किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई थी। बताया जा रहा है कि गौरव की पोस्टिंग झंडूता क्षेत्र में लगभग एक वर्ष पहले हुई थी। उसे गन लाइसेंसिंग और ई-सेवाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी गई थी।
पुलिस अब उसकी पूरी सर्विस हिस्ट्री और एक्सेस लॉग की भी जांच कर रही है। पूरे मामले में पुलिस का मुख्य फोकस डिजिटल साक्ष्यों पर है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि सिस्टम में किसी प्रकार की अनधिकृत एंट्री या फर्जी अप्रूवल कैसे किए गए। इसी दिशा में डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रिमांड के दौरान गौरव से उन अन्य सफेदपोशों और कर्मचारियों के बारे में पूछताछ की जाएगी, जो इस संगठित अपराध में पर्दे के पीछे से मदद कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि उसने एसडीएम और क्लर्क के नाम पर फर्जी यूजर आईडी बनाकर पोर्टल में सेंध लगाई। बिना किसी भौतिक रिकॉर्ड के वाहनों के वजन, बैंक हाइपोथिकेशन और ऑनर सीरियल नंबर में अवैध बदलाव किए। सोलन के अलावा बिलासपुर, मंडी और ऊना तक फैले एजेंटों के नेटवर्क को वही कंट्रोल कर रहा था। एसपी सोलन टी एसडी वर्मा ने बताया कि आरोपी को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।