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Solan News: भक्तमाल कथा में तुलसीदास को बताया संतों का सुमेरु

Thu, 16 Jul 2026 11:39 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
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बद्दी के संडोली में भक्तमाल के दूसरे दिन आरती में भाग लेते हुए स्थनीय लोग- संवाद।
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दूसरे दिन सुनाई गई भक्तमाल ग्रंथ के सुमेरु की कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बाबा बालक नाथ मंदिर हरिपुर संडोली में गुप्त नवरात्र के उपलक्ष्य में साप्ताहिक भक्तमाल कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन महलोग क्षेत्र के कथा व्यास पंडित जगमोहन दत्त शास्त्री ने गोस्वामी तुलसीदास को संतों की माला का सुमेरु बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में सरलता ही भक्ति का सर्वोत्तम साधन है।
पंडित शास्त्री ने बताया भक्तमाल ग्रंथ में गोस्वामी तुलसीदास को सुमेरु कहा जाता है। नाभादास ने अपनी रचना में उन्हें यह उपाधि दी थी। तुलसीदास का चरित्र और भगवान राम के प्रति उनका प्रेम सभी संतों में सर्वोपरि माना गया है। कथा में तुलसीदास की महिमा को एक दिव्य प्रसंग के माध्यम से दर्शाया गया। नाभादास के गुरु अग्रदेवाचार्य ने एक बार वृंदावन में संतों का विशाल भंडारा आयोजित किया था। तुलसीदास संतों की भीड़ में जाने के बजाय एकांत में अपने ठाकुर जी की पूजा में लीन रहे। जब नाभादास ने उन्हें भंडारे में बुलाया, तो तुलसीदास ने भीड़ के कारण आने से मना किया। तब स्वयं गोपीश्वर महादेव ने प्रकट होकर उन्हें संतों के उत्सव में अवश्य जाने को कहा। इसके बाद तुलसीदास जब नाभादास के साथ वृंदावन के मदन मोहन मंदिर गए, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें धनुष-बाण धारी श्रीराम के रूप में दर्शन दिए।
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इस दिव्य प्रसंग के कारण भक्तमाल परंपरा में तुलसीदास को संतों की माला का सुमेरु स्वीकार किया गया। पंडित शास्त्री ने तुलसीदास को भगत मार्ग का सुमेरु माना। उन्होंने कहा कि तुलसीदास ने घर-घर में भगवान की भक्ति का अलख जगाया। यह भक्ति आज भी जागृत है और आगे भी जारी रहेगी।
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कथावाचक ने सभी से हनुमान चालीसा का अधिक से अधिक पाठ करने का निवेदन किया। इस अवसर पर गुरदेव, मदन बाबा, स्वर्ण प्रधान, बब्बू लबाना और बलराम पुजारी सहित कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। बलविंद्र ठाकुर, महेंद्र, राम गोपाल अधिवक्ता, अजमेर सिंह और राज कुमार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में दर्जनों अन्य ग्रामीण भी शामिल हुए।
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