शक्ति के बिना शांति की बात कोई नहीं सुनता : प्रताप सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजेहरा खंड का विजयदशमी उत्सव झिड़ीवाला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व बीडीओ राजकुमार ने की, जबकि संघ के हिमाचल प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप सिंह मुख्य वक्ता रहे।
प्रताप सिंह ने कहा कि शक्ति के बिना शांति की बात कोई नहीं सुनता। शस्त्र पूजन का उद्देश्य सज्जन शक्ति को संगठित और सामर्थ्यवान बनाना है, ताकि समाज में बुरी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि शक्ति का उपयोग रक्षा के लिए होना चाहिए, आक्रमण के लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि विजयदशमी असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध, मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का मर्दन और अज्ञातवास के बाद पांडवों द्वारा शमी वृक्ष से शस्त्र उठाने के प्रसंग इस पर्व से जुड़े हैं। यह पर्व समाज में आत्मविश्वास, पराक्रम और संगठन की भावना मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
तुलसीदास की चौपाई ‘विनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए समाज का संगठित होना जरूरी है। प्रताप सिंह ने नशे, ऊंच-नीच, सामाजिक भेदभाव, स्वार्थ और आलस्य को समाज की प्रगति में बाधक बताया। उन्होंने कहा कि इन बुराइयों को दूर करने के लिए परिवार, युवाओं और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। आपसी सहयोग और सामाजिक समरसता से ही सकारात्मक बदलाव संभव है।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने गणवेश में पथ संचलन किया। इसके माध्यम से अनुशासन, संगठन और एकजुटता का संदेश दिया गया। उत्सव में शस्त्र पूजन की परंपरा और सामाजिक जीवन में संगठन के महत्व पर भी जोर दिया गया।