किसी भी उत्पाद की बिक्री के लिए पैकेजिंग अहम है। तैयार माल को सुरक्षित मार्केट तक पहुंचाना और आकर्षक डिब्बे से बाजार में उत्पाद की अलग पहचान बनाना पैकेजिंग का फंडा है। लिहाजा हर छोटे-बड़े औद्योगिक विकास में पैकेजिंग उद्योग अपनी अहम जगह बनाने में कामयाब साबित हो रहा है। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग ने बद्दी में लघु उद्योग भारती के सहयोग से डिजाइन क्लिनिक पर कार्यशाला का आयोजन कर उद्योगपतियों को जागरूक किया।
वक्ताओं ने कहा कि आज के युग में बाजार की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए बेहतर डिजाइनिंग और अच्छी पैकिंग का बहुत ज्यादा महत्व है। यह कंपनियों के उत्पादों के लिए संजीवनी साबित होता है। विदेशों में सुंदर पैकिंग और डिजाइनिंग बहुत ज्यादा पुरानी है, जबकि भारत में इसका प्रचलन अब बढ़ रहा है। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर विशेषज्ञ आईआईटी दिल्ली विश्वजीत कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एमएसएमई विभाग के प्रांतीय निदेशक सीवी सर्राफ ने की।
लघु उद्योग भारती के प्रदेश महामंत्री राजीव कंसल ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। विभाग के प्रांतीय निदेशक सीवी सर्राफ ने कहा कि डिजाइनिंग और पैकिंग पर सूक्ष्म उद्योगों के लिए 75 फीसदी तथा लघु उद्योगों के लिए 60 फीसदी अनुदान का प्रावधान है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली औद्योगिक प्रदर्शनियों के बारे तथा वहां जाने के लिए होने वाले खर्च में मिलने वाली सब्सिडी के बारे लघु उद्यमियों को अवगत कराया। सहायक निदेशक संजय वर्मा ने उद्योग आधार और एमएसएमई डाटा बैंक बारे विस्तार से अवगत कराया।
इस मौके पर अखिल मोहन अग्रवाल, बद्दी चैप्टर के अध्यक्ष एनपी कौशिक, महासचिव अशोक राणा, निर्मल सिंगला, बरोटीवाला चैप्टर के प्रधान संजीव शर्मा, संरक्षक एमपी शर्मा, सीआईआई के पूर्व प्रधान अरुण रावत, तरसेम शर्मा, राजेश पटियाल, चेतन, रमन शर्मा, नीरज वशिष्ठ, विक्रम गौतम, प्रदीप गर्ग, राजेश, महेश सचदेवा, अनूप, विशाल, चौहान, गोपाल, बलबीर, केएस आर्य, शिव कृष्ण, दुष्यंत पुंडीर, किशोर ठाकुर, सुमित सिंगला, ओमकुमार, अरुण, आरके शर्मा, गुरदीप ठाकुर, पीएस पाल, केके सिंह, दीपांकर शर्मा, मनमोहन शर्मा, दीपक कुशवाहा, महेश कौशल, ऋषि, वासु कंसल, विक्रांत ठाकुर, हंसराज भारद्वाज, केवल ठाकुर और ओमपाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।