कनफेक्शनरी और लिफाफा बंद खाद्य पदार्थों को तैयार करने वाली सोलन की एक नामी कंपनी ने टैक्स के नाम पर 11 करोड़ का फर्जीवाड़ा कर डाला है। टैक्स बचाने के चक्कर में फर्म ने दिल्ली से तैयार माल मंगवाकर हिमाचल की मार्केट में बेच दिया। कागजों में बिक्री दिल्ली में ही दर्शा दी।
इससे हिमाचल में बिक्री पर लगने वाले 13.75 फीसदी मूल्य वर्धित की चोरी कर ली। जांच में मामला पकड़ में आने के बाद आबकारी एवं कराधान विभाग के दक्षिणी उड़नदस्ते ने फर्म को 3.26 करोड़ का भारी भरकम कर और जुर्माना ठोका है। इसमें 70 लाख की रकम वसूल ली है। शेष राशि एक माह के भीतर जमा करवाने की विभाग ने हिदायत दी है।
इस कार्रवाई से खाद्य उत्पादों से जुड़े कारोबारियों में हड़कंप मचा है। कर और जुर्माने की पुष्टि उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त डॉ. सुनील कुमार ने की। उन्होंने कहा कि ईटीओ अमित सोष्टा, इंस्पेक्टर रूपेंद्र सिंह के अलावा चमन लाल, बिंदु बख्शी, राकेश आत्मस्वरूप ने इस केस में प्रशंसनीय कार्य किया है।
यह है मामला
विभाग ने जांच में पाया कि कारोबारी दिल्ली से खरीदे सामान को दोबारा दिल्ली की मार्केट में ही बेच रहा है। सामान्य रूप से कोई कारोबारी ऐसा मूल्यवर्धन के लिए करता है लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं था। संदेह होने पर विभाग ने इस पर नजर रखना शुरू कर दी। विभाग की वेबसाइट पर पाया गया कि डीलर वैट का 26 नंबर फार्म भी फर्जी भर रहा है।
कारों, बसों और बाइक के नंबर
दिल्ली में जिन फर्मों की बिक्री बताई गई थी, वह या तो बंद थी या अस्तित्व में ही नहीं थी। यहां तक की जिला मालवाहक गाड़ियों के नंबर बिलों में थे, वह भी फर्जी थे। गाड़ियों के जो नंबर थे वह बसों, कारों या दोपहिया वाहनों के थे।
टैक्स चोरी का कारण
सूबे की फार्म यदि दिल्ली से रॉ मैटीरियल मंगवाकर तैयार उत्पादों को दिल्ली में ही बेचती है तो उस पर 2 फीसदी सीएसटी वसूला जाता है। अगर तैयार उत्पादों को हिमाचल की मार्केट में बेचा जाता है तो उस पर 13.75 के हिसाब से वैट वसूला जाता है। लिहाजा टैक्स बचाने के चक्कर में फर्म ने तैयार माल हिमाचल में ही फर्जी तरीके से बेच दिया और बिक्री दिल्ली की फर्मों की दिखा दी।
जांच में यह पाया
जांच में पाया गया कि फर्जी तरीके से डीलर ने लगभग 11 करोड़ का माल बेचा है। दो फीसदी के हिसाब से 22 लाख टैक्स सरकार को दिया। वास्तव में कर की रकम 13.75 फीसदी की दर से 1.5 करोड़ के करीब बनती थी। ऐसे में फर्म ने सरकार को करीब 1.28 करोड़ का चूना लगा दिया।