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अश्वनी के खड्ड के पानी में पीलिया का वायरस

Fri, 13 Jan 2017 11:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
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सोलन शहर और आसपास सटे करीब साठ फीसदी पानी की आपूर्ति करने वाली अश्वनी खड्ड के बिना उपचार के जल के नमूनों में हैपेटाइट्स-ए यानी पीलिया का वायरस पाया गया है। हालांकि उपचारित जल में जांच के बाद किसी भी प्रकार का वायरस नहीं मिला है। एहतियात के तौर पर प्रशासन पहले ही अश्वनी खड्ड से सोलन शहर के लिए जलापूर्ति को बंद कर चुका है।
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आईपीएच नियमित रूप से अश्वनी खड्ड के जल के नमूने राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान पुणे भेज रहा है। लिहाजा अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति तभी आरंभ की जाएगी जब संस्थान को लगातार भेजे दो नमूनों में वायरस नहीं मिलेगा। इसके अलावा विभिन्न पेयजल स्रोतों के नमूने भी नियमित रूप से जांच के लिए भेजे जा रहे हैं ताकि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। इसकी पुष्टि डीसी डॉ. राकेश कंवर ने की है।

 उन्होंने कहा कि वर्तमान में सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा सोलन शहर के लिए पेयजल की आपूर्ति गिरि नदी से सुनिश्चित बनाई जाएगी। आवश्यकतानुसार गिरि से आपूर्ति बढ़ाई जाएगी ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। वर्ष 2016 में भी जनवरी में जिले में पीलिया का प्रकोप फैला था। करीब 600 लोगों में पीलिया का वायरस पाया गया था।  
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घरों की टंकियों से नमूने लेने के निर्देश
डीसी ने नगर परिषद द्वारा जल भंडारण टैंक तथा लोगों की घरों की टंकियों से नियमित रूप से जल के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाने के निर्देश दिए हैं ताकि पानी की गुणवत्ता की जांच होती रहे। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा नगर परिषद सोलन को निर्देश दिए हैं कि शहर में की जा रही जलापूर्ति पर नजर रखी जाए तथा यह सुनिश्चित बनाया जाए कि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है।

एहतियात: सुपरक्लोरीनेशन शुरू, बीस मिनट उबालें पानी
निर्धारित मापदंडों के अनुरूप भंडारण टैंकों में जल का उपचार एवं सुपर क्लोरीनेशन शुरू कर दी है। उपचारित जल को पूरी तरह सुरक्षित बताया जा रहा है। लोगों से आग्रह किया कि वे पीलिया तथा अन्य जल जनित रोगों से बचाव के लिए पानी को कम से कम 15 मिनट उबालकर पीएं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पास समुचित मात्रा में क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों को परामर्श दिया कि वे प्रतिदिन 20 लीटर जल में एक क्लोरीन की गोली मिलाएं तथा गोली मिलाने के दो घंटे बाद इस जल को पीने के लिए उपयोग में लाएं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया वे अपने घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें। शौच जाने के बाद तथा खाना खाने से पूर्व अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं।

यह है हैपेटाईटस-ए
हैपेटाईटस एक वायरल रोग है। इसे सामान्य भाषा में पीलिया या जोंडिस भी कहा जाता है। विषाणुजन्य पीलिया के 5 प्रकार हैं। इसमें हैपेटाईटस-ए, बी, सी, डी, ई शामिल है। इसमें बी सबसे खतरनाक माना जाता है। लीवर में क्षतिग्रस्त हो सकता है। रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। ए, बी और सी ज्यादा प्रमाण में देखा जाता है।
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यह है लक्षण
1-त्वचा का रंग पीला पड़ना, पेशाब पीला होना
2- बदनदर्द, सिरदर्द, कमजोरी और थकान
3- जी मचलना, दस्त लगना या कब्ज होना
4- बुखार, पेट में दांयी तरफ हल्का दर्द
5- खुजली, जोड़ों में दर्द
6- हलके रंग का मल आना

यह बरतें सावधानी
-अपने आसपास पूरी तरह से साफ-सफाई बनाए रखें और मक्खियों को न फैलने दें।
-भोजन पकाने और खाने से पहले तथा शौचालय से लौटने पर हाथों को साबुन या डेटॉयल से अच्छी तरह धोएं। - नाखूनों को समय-समय पर काटते रहें।
-पानी में क्लोरीन की गोलियां मिलाकर प्रयोग करें।
-पानी को लगभग 10 से 15 मिनट तक उबालने के बाद ही प्रयोग में लाएं।
-बाजार के कटे फल और सब्जियां न खाएं।
-घर में भी सब्जी और फलों को अच्छी तरह धोकर ही प्रयोग करें।
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