शहर के पीने के पानी के मुख्य स्टोरेज टैंकों से सप्लाई का जिम्मा संभाले आईपीएच और नगर परिषद के दो कर्मचारी ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में धुत्त मिले। पुलिस का दावा है कि दबिश देकर दोनों को शराब के नशे में पकड़ा गया।
आरोपियों का सोलन अस्पताल में मेडिकल करवाया गया है। पुलिस ने यूरिन और रक्त के सैंपल जुन्गा लैब में जांच के लिए भेजे हैं। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही शराब के सेवन की पुष्टि हो पाएगी। उधर पुलिस ने दोनों आरोपियों के मामले संबंधित विभागों को सौंप दिए हैं।
पुलिस के मुताबिक पुलिस थाना सोलन के कर्मचारी राकेश कुमार गुलेरिया पानी के मुख्य स्टोरज टैंकों की जांच के लिए सोलन टैंक रोड पर पहुंचे। वहां पर आईपीएच और नगर निगम के कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे। पुलिस के मुताबिक इन दोनों के मुंह से दारू की दुर्गंध आ रही थी।
मौके से दोनों को सोलन अस्पताल लाया गया। जहां उनका मेडिकल करवाया गया। एसपी अंजुम आरा ने कहा कि पुलिस मामले में जांच कर रही है। संबंधित कर्मचारियों के विभागों को सूचना भेज दी है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि कर्मियों के शराब के नशे में धुत्त होने की किसी तरह की सूचना पुलिस की तरफ से नहीं दी है। इस मामले की जानकारी उन्हें नहीं है।
यह कार्य दोनो कर्मियों के जिम्मे
नगर परिषद के अध्यक्ष पवन गुप्ता का कहना है कि शहर के मुख्य स्टोरेज टैंकों में पानी की सप्लाई गिरि और अन्य स्रोतों से एकत्र की जाती है। आईपीएच कर्मी का कार्य स्टोरेज टैंकों में एकत्र करना होता है। पाइपों को खोलने और बंद करने का कार्य यही कर्मी करते है। निगम का कर्मी शहर को पानी की सप्लाई छोड़ता है। कर्मियों के नशे में होने की सूचना उन्हें नहीं मिली है।
एक तरफ पेयजल किल्लत दूसरी तरफ आरोप
शहर एक तरफ पेयजल किल्लत से जूझ रहा है। वहीं दूसरी तरफ शहर में मुख्य पानी के स्टोरेज टैंकों से पानी की सप्लाई का जिम्मे संभाले बैठे आईपीएच और नगर परिषद के कर्मचारियों पर शराब के सेवन जैसे संगीन आरोप लग रहा है। चिंताजनक यह है कि पानी को ट्रीटेमेंट खुले टैंकों में स्टोर किया जाता है। उसके बाद ही सुबह या शाम तय समय पर पानी की सप्लाई लोगों के घरों तक छोड़ी जाती है।
चिंताजनक: 38 लाख गैलन पानी
टैंक रोड में तीन मुख्य टैंकों में पानी स्टोर किया जाता है। सबसे बड़े 18 लाख गैलन पानी का स्टोरेज टैंक है। यहां पानी गिरि और अश्वनी से पानी स्टोर किया जाता है। वर्तमान में अश्वनी से पानी की सप्लाई पर प्रतिबंध लगा है। लिहाजा अभी तक गिरि से ही पानी की सप्लाई आ रही है। यह पानी आगे 12 और आठ लीटर पानी के टैंकों में छोड़ा जाता है।
यह कार्य आईपीएच के कर्मी के जिम्मे रहता है। यह टैंक खुले पड़े हैं। अगर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद इन टैंकों की फेंसिंग और ढकने का कार्य भी शुरू हो चुका है। इन टैंकों से आगे शहर को पानी की सप्लाई दी जाती है। जिसका जिम्मा नगर परिषद के कर्मी का है। नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि दोनो कार्य काफी संवेदनशील हैं। लिहाजा कर्मियों पर नशे में धुत्त होने के आरोप लगना चिंताजनक है।