पीएमसी विशेषज्ञों ने ध्याडी-धाली-जदारी सब-प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण
किसानों ने पॉलीहाउस और हार्वेस्ट नुकसान रोकने के लिए सोलर ड्रायर की रखी मांग
जाइका के सहयोग से क्षेत्र को मिलीं 4 लाख की कृषि मशीनें, सड़क और सिंचाई चैनलों का हुआ निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
कंडाघाट(सोलन)। जाइका पोषित ध्याडी-धाली-जदारी सब-प्रोजेक्ट के तहत परियोजना प्रबंधन परामर्श (पीएमसी) विशेषज्ञों द्वारा साइट निरीक्षण एवं फील्ड विजिट का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों को ब्लूबेरी की खेती और एग्रीबिजनेस अपनाने पर जोर दिया गया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी कृषि गतिविधियों की समीक्षा करना, किसानों से संवाद स्थापित करना तथा आजीविका सुदृढ़ीकरण के लिए एग्रीबिजनेस की संभावनाओं को तलाशना था। विशेषज्ञों के दल में डॉ. नरदेव ठाकुर, डॉ. पीएल शर्मा और डॉ. आरएस ठाकुर शामिल रहे, जिनके साथ बीपीएम सोलन डॉ. जितेंद्र कुमार और बीपीएमयू सोलन की कृषि विशेषज्ञ तन्वी धौल्टा भी मौजूद रहीं।
निरीक्षण के दौरान राधा कृष्ण कृषक विकास संघ (केवीए) के अध्यक्ष प्रद्युम्न ठाकुर, सचिव रमेश ठाकुर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने केवीए के साथ परियोजना के स्थायित्व और रिकॉर्ड संधारण पर विस्तृत चर्चा की। विशेषज्ञों ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ऑफ सीजन सब्जियों, नकदी फसलों और ब्लूबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण करने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, संगठन की दीर्घकालिक वित्तीय आत्मनिर्भरता के लिए केवीए खाते में नियमित योगदान राशि बढ़ाने का सुझाव दिया गया, ताकि परियोजना अवधि समाप्त होने के बाद भी गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें।
कार्यक्रम में महिला शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुषमा ठाकुर व अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया। विशेषज्ञों ने महिलाओं को सामूहिक स्तर पर आय-सृजन गतिविधियां शुरू कर आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रोत्साहित किया। फील्ड विजिट के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं और मांगें प्रमुखता से रखीं। किसानों ने बताया कि उपयुक्त रख-रखाव के अभाव में लगभग 30 प्रतिशत उपज पोस्ट-हार्वेस्ट के दौरान खराब हो जाती है। इस नुकसान को रोकने और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के लिए किसानों ने क्षेत्र में सोलर ड्रायर और संरक्षित खेती के लिए पॉलीहाउस उपलब्ध कराने की मांग की।
किसानों ने जाइका द्वारा क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। किसानों ने बताया कि परियोजना के तहत 4 लाख रुपये से अधिक मूल्य की आधुनिक कृषि मशीनरी, संपर्क सड़कें और सिंचाई चैनलों का निर्माण कराया गया है, जिससे खेती में श्रम और लागत दोनों की बचत हुई है। अंत में विशेषज्ञों ने किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर आधुनिक कृषि अपनाने का आह्वान किया।