लघु व्यापारी कल्याण परिषद के प्रदेश प्रभारी देव आनंद गौतम की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को एसडीएम एकता कापटा से मुलाकात की तथा उन्हें दोबारा बसाने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम के माध्यम से उपायुक्त सोलन को ज्ञापन भी सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में परवाणू के खोखा धारक भी शामिल रहे।
वैंडिंग एक्ट-2014 के तहत रेहड़ी, फड़ी और खोखा धारकों को स्थायी रूप से बसाने की योजना है। लेकिन इस योजना पर अमल नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि उनके लिए स्वरोजगार का साधन जल्द मुहैया करवाना चाहिए। मांग की कि नप परवाणू वैंडिंग एक्ट के तहत जमीन कारोबार के लिए दी जाए। कहा कि जब तक उन्हें कारोबार के लिए जमीन मुहैया नहीं करवाई जाती तब तक खोखा धारकों को वहां से नहीं हटाया जाए।
उन्होंने बताया कि यह खोखा धारक तीस वर्षों से यहां पर कारोबार कर रहे हैं। यही नहीं व्यवसाय करने के लिए वह सेल टैक्स की पर्ची कटवाते हैं और आयकर रिटर्न भी भरते हैं। इसके अलावा कई खोखों में बिजली के मीटर भी लगे हैं। कइयों ने तो अपने व्यवसाय को सुचारु रूप से चलाने के लिए बैंकों से ऋण भी ले रखा है। लेकिन अब कारोबार बंद होने से वह ऋण भी नहीं चुका पा रहे हैं। इस मौके पर राम आशीष, रामलाल, पवन कुमार, लाल बाबू शाह, लखविंद्र, शेर सिंह, मदन, लाली और अन्य लोग मौजूद रहे।
यह पूरा मामला
परवाणू में खोखा धारकों का मामला अदालत में चल रहा था। वहां से आदेश मिलने के बाद हिमुडा ने अपनी जमीन से खोखा धारकों को हटा दिया था। लोगों ने कहा कि खदेड़े गए सभी खोखा धारक तीस सालों से यहां खोखे लगाकर अपनी रोजी रोटी कमा रहे थे। लेकिन आज वो बेरोजगार हो गए हैं। परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो चुका है। इसके अलावा उनके पास आय का कोई साधन नहीं है।