आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने कहा कि गत वर्ष बारिश एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रदेश में 783 करोड़ का नुकसान हुआ था। लेकिन केंद्र सरकार से इसके एवज में महज 81 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
राणा सोमवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की विभिन्न गतिविधियों और तैयारियों की समीक्षा की गई। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी राकेश कंवर ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए जिला आपदा प्रबंधन योजना की जानकारी दी।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन संदीप नेगी ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। राणा ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में किसी भी आपदा से प्रभावी रूप से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा कार्रवाई दल (एनडीआरएफ) की एक कंपनी कांगड़ा जिले के नूरपुर में स्थापित की जा रही है।
एनडीआरएफ की इस कंपनी की एक इकाई शिमला जिला के सुन्नी में तथा दूसरी इकाई कांगड़ा जिला के नूरपुर में स्थापित की है। कंपनी स्थापित करने के लिए भूमि का अधिग्रहण कर लिया है। प्रदेश सरकार ने भू-अधिग्रहण के लिए 6.13 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। कहा कि सभी जिलों में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्यरत हैं।
इसके अलावा इन्हें निर्देश दिए कि जिला एवं उपमंडल स्तर के आपदा नियंत्रण कक्षों के दूरभाष नंबर के बारे में भी आम जनता को जानकारी होनी चाहिए। जिला स्तर पर दूरभाष नंबर 01792-223836, 223706 पर आपदा के संबंध में जानकारी प्रदान की जा सकती है।
आपदा नियंत्रण में आमजन की नियमित भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न आपदाओं के विषय में आम लोगों को जागरूक बनाया जाए तथा समय-समय पर महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में नियमित आपदा मॉकड्रिल आयोजित की जाएं।
प्रदेश सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में पुलिस तथा गृह रक्षकों के कम से कम 30-30 जवान आपदा प्रबंधन के लिए तैयार होने चाहिए। सोलन जिले में पुलिस तथा गृह रक्षकों के 80 अधिकारियों तथा जवानों को इस कार्य के लिए तैयार किया गया है।