रूड़ा के श्रीराम लोक मंदिर में विवादित निर्माण के भूमि तबादले का मामला सरकार एक बार फिर कैबिनेट में ले जाने की तैयारी में है। इससे पहले भूमि तबादले का मामला एक बार सरकार कैबिनेट में लगा चुकी है। एक वरिष्ठ मंत्री के विरोध से इस पर सहमति नहीं बनी थी। उधर, डीसी सोलन ने जांच पूरी कर इस विवादित भूमि के साथ लगती 60.12 बीघा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का खतरा बताया है। रिपोर्ट में श्री रामलोक मंदिर में सीआईडी टीम की ओर से पकड़ी गई चार तेंदुओं की खालों का भी जिक्र किया है। इसके भूमि तबादले का मामला एक बार फिर लगने वाला है। ऐसे में विवादित मामले को नजरअंदाज करने के बाद भी भूमि तबादले की कवायद कई सवाल खड़े कर रही है।
रिपोर्ट में बताया है कि तुंदल पंचायत के मौजा रूड़ा में खसरा नंबर 371/366/321 में अलाटेबल पूल की 60.12 बीघा सरकारी भूमि है। यह पहाड़ी के आकार में है। इसकी चोटी पर अवैध रूप से मंदिर बनाया जा रहा है। यह 19 बिस्वा भूमि वर्ष 2015 में सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए पंचायतीराज विभाग को हस्तांतरित की गई थी, लेकिन वहां पर सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं किया गया। मंदिर कमेटी ने इसी खसरा नंबर पर साथ लगती 2.06 बीघा भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है।
ऐसे चला मामला
मामला संज्ञान में आने के बाद जांच के दौरान प्रशासन ने मंदिर कमेटी और पंचायतीराज विभाग को अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश जारी किए। इसके बाद स्थानीय लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष एक प्रस्ताव रखा कि मंदिर निर्माण के लिए 2.06 बीघा सरकारी भूमि का खसरा नंबर 87/1 में 3 बीघा निजी भूमि के साथ तबादला किया जाए। जिस व्यक्ति की यह भूमि है, वह इसके लिए तैयार था। प्रशासन ने जब इस भूमि का बाजार मूल्य निकाला तो तीन बीघा निजी भूमि की कीमत 1.10 सरकारी भूमि के बराबर ही निकली। इस तबादले पर निर्णय सरकार को लेना है। पिछले कई महीनों से यह मामला लंबित पड़ा है।
यह भी किया स्पष्ट
जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यदि 3 बीघा भूमि का 1.10 बीघा सरकारी भूमि के साथ तबादला किया जाता है तो इसकी निशानदेही की जाए। मंदिर और साथ के भवन के निर्माण को भूमि चिन्हित की जाए। 1.10 बीघा भूमि के अंदर निर्माण किया जाए। साथ लगती सरकारी भूमि पर निर्माण नहीं होगा। पंचायतीराज विभाग कां आवंटित की गई भूमि प्रदेश सरकार की ही रहेगी। रिपोर्ट में कहा है कि यदि 1.10 सरकारी भूमि का 3 बीघा निजी भूमि के साथ तबादला होता है तो भविष्य में साथ लगती 60.12 बीघा भूमि पर अतिक्रमण नहीं होगा, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार को भेजी गई है रिपोर्ट
डीसी सोलन डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि मौजा रूड़ा में खसरा नंबर 371/366/321 में 1.10 बीघा भूमि को खसरा न बर 87/1 में 3 बीघा के तबादले का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा गया है। यह मामला सरकार के पास अभी लंबित है। इस खसरा नंबर 371/366/321 में अॅलाटेबल पूल की 60.12 बीघा सरकारी भूमि है। इस तबादले के बाद भविष्य में साथ लगती 60.12 बीघा भूमि पर अतिक्रमण नहीं होगा, इस स भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार को इस बारे रिपोर्ट भेजी गई है।
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