संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में सभी पारंपरिक जल स्रोतों, चेक डैम, तालाब, बोरवैल और अन्य जल स्रोतों के जीर्णोद्धार कर इन्हें पुनर्जीवित किया जाएगा। जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों को एक मिशन मोड में लिया जाएगा और इसके लिए लक्ष्य निर्धारित करेंगे।
जिला सोलन जल शक्ति अभियान के नोडल अधिकारी एवं केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के निदेशक विकास डोगरा ने ‘कैच द रेन’ के संदर्भ में बैठक में ये निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए जल शक्ति विभाग के अलावा ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वन, कृषि और अन्य विभागों की भूमिका भी बहुत ही अहम है। ये विभाग अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में विभिन्न जल संरक्षण कार्यों की विस्तृत योजना तैयार कर उसके अनुसार विभिन्न गतिविधियों को अंजाम दें।
बन रहे 110 अमृत सरोवर
उपायुक्त कृतिका कुलहरी ने बताया कि 110 अमृत सरोवर स्थलों का चयन कर 88 अमृत सरोवर का निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है। जल शक्ति अभियान के तहत जिले में 2700 बावड़ियों की जियो टेगिंग कर दी गई है।
इसके अतिरिक्त जलागम विकास घटक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत जिले के विकास खंड नालागढ़ और धर्मपुर का चयन किया गया है। इन विकास खंडों में 27 से 30 जून तक पौधरोपण, कला प्रदर्शन और भू-संरक्षण पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया।
पोस्टर का विमोचन
बैठक में विकास डोगरा ने जल संरक्षण पर आधारित एक पोस्टर का विमोचन और जल संरक्षण लोगो का शुभारंभ भी किया। इससे पहले कृतिका कुलहरी ने जिला सोलन जल शक्ति अभियान के नोडल अधिकारी एवं केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के निदेशक विकास डोगरा का स्वागत किया।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सोलन जफर इकबाल, वैज्ञानिक राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की डॉ. दिगंबर सिंह, ग्रामीण विकास अभिकरण सोलन के परियोजना अधिकारी राजकुमार, उपमंडलाधिकारी सोलन विवेक शर्मा, उपमंडलाधिकारी कंडाघाट विकास सूद उपस्थित थे।