अदालत ने कहा जेल नहीं, जमानत है नियम
सह-आरोपी के बैग से बरामद हुआ था 11.21 ग्राम चिट्टा
इंस्टाग्राम के जरिए खेप मंगाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। विशेष न्यायाधीश शरद कुमार की अदालत ने एनडीपीएस के मामले में आरोपी 12वीं कक्षा की छात्रा को जमानत दे दी है। अदालत ने टिप्पणी की कि कानून में जेल अपवाद और जमानत नियम है। लंबी हिरासत से छात्रा की स्वतंत्रता के साथ उसका भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 24 सितंबर 2026 को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने गुप्त सूचना के आधार पर सोलन में छात्रा और सह-आरोपी अब्दुल रहमान को पकड़ा था। सह-आरोपी के बैग से 11.21 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था। इस मामले में पुलिस थाना सदर सोलन में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। एफएसएल रिपोर्ट में बरामद पदार्थ की पुष्टि डायसेटाइलमॉर्फिन के रूप में हुई।
जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर 23 सितंबर को पंजाब के एक व्यक्ति से इंस्टाग्राम के जरिए खेप मंगाई थी। छात्रा की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है। जांच पूरी हो चुकी है और अब हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि छात्रा की 12वीं की परीक्षाएं 28 अक्तूबर से शुरू होनी थीं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बरामद मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से कम होने के कारण इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कड़ी शर्तें लागू नहीं होतीं। छात्रा 24 सितंबर से न्यायिक हिरासत में थी। अदालत ने एक लाख रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि के स्थानीय जमानतदार की शर्त पर उसे जमानत दे दी। छात्रा को जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में शामिल होने के निर्देश भी दिए गए हैं।