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Solan News: नालागढ़ में मक्की की फसल में लगा सुंडी रोग, फसल तबाह

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कई बार दवा छिड़काव करने पर भी नहीं पड़ रहा कोई असर
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कम बारिश होने से लगा था सुंडी, अब तक नहीं हो पा रहा खत्म
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। कम बारिश होने से मक्की की फसल सुंडी रोग (फॉल आर्मी वर्म) से प्रभावित है। तीन-तीन बार दवा का छिड़काव करने के बाद भी इससे राहत नहीं मिल रही है। छिड़काव के दस दिन तक दवा का असर रहता है और असर खत्म होते ही यह दोबारा अपना प्रकोप शुरू कर देता है। लगातार बीमारी के चलते किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है और अब मक्की की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है।
बीबीएन में 4 हजार हेक्टेयर जमीन पर लोगों ने मक्की की फसल लगाई है। इस बार मक्की की फसल सुंडी रोग का प्रकोप जारी है। किसान कृषि विशेषज्ञों को ओर से बताई गई दवा का छिड़काव कर रहे हैं लेकिन दवा दस दिन तक ही असर कर रही है। किसान मक्की की फसल पर 3-3 बार कीटनाशक का छिड़काव कर चुके हैं लेकिन यह रोग थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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नंगल के किसान टेक चंद, भोगपुर के विमल कुमार, सैनी माजरा के सुच्चा सिंह व राजपुरा के प्रकाश ने बताया कि मक्की की फसल अब घाटे का सौदा बनी गई है। महंगा बीज, खाद व दवाई डालने के बाद भी फसल में रोग लग रहा है। इससे किसानों को अपनी फसल बचाना काफी कठिन हो गया है। कई-कई बार छिड़काव करने के बाद भी रोग कम नहीं हो रहा है।
दभोटा के सुरमुख सिंह ने बताया कि एक हेक्टेयर जमीन में मक्की की फसल पर 800 रुपये की दवाई छिड़क चुके हैं। एक किसान 3-4 बार इसका छिड़काव कर चुका है लेकिन इसके बावजूद भी सुंडी मरने के नाम नहीं ले रही है। बाजार में नकली दवाइयां आ गई हैं किसान चारों ओर से लूट रहा है। अब मक्की उगाना किसान के बस की बात नहीं रही है।
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कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने बताया कि कम बारिश के चलते यह रोग मक्की में लगा है। बारिश का पानी मक्की के पौधे में भरने से यह सुंडी मर जाती है। उन्होंने कोरोजीन का छिड़काव करने की सलाह दी है। एक लीटर में डेढ़ एमएल दवाई मिलाकर इसका छिड़काव करने से इसका प्रभाव समाप्त हो जाता है।
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