अंबुजा कंपनी में 36 दिन से निष्कासन को लेकर संघर्ष कर रहे मजदूरों और यूनियन के पदाधिकारियों सहित अन्य सदस्यों को पुलिस ने तय नियमों के तहत गेट से बाहर खदेड़ दिया।
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अंबुजा कंपनी में 36 दिन से निष्कासन को लेकर संघर्ष कर रहे मजदूरों और यूनियन के पदाधिकारियों सहित अन्य सदस्यों को पुलिस ने तय नियमों के तहत गेट से बाहर खदेड़ दिया। एसपी सोलन अंजुम आरा और डीएसपी हेमंत की अगुवाई में पुलिस टीम ने न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की।
इस दौरान कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण भी हो गया था। लेकिन पुलिस बल के आगे एक न चली। उधर मजदूर यूनियनों ने इस कार्रवाई पर रोष जताया है। साथ ही आंदोलन को उग्र करते हुए एनएच को बंद करने की धमकी दी है।
यूनियन के प्रधान लच्छीराम ठाकुर ने बताया कि सभी शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे लेकिन वीरवार के दोपहर बाद पुलिस बल ने वर्ष 2012 का एक आदेश थमाते हुए उन्हें परिसर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। लिहाजा कार्यकारिणी ने फैसला लिया कि अब गेट के बाहर शांतिपूर्ण संघर्ष करते रहेंगे और प्रतिदिन सुबह और शाम को एक रैली निकालकर कंपनी के खिलाफ रोष जताएंगे। यह संघर्ष हर रोज तब तक जारी रहेगा जब तक कंपनी कोई समझौता नहीं कर लेती।
यदि कंपनी ने तीन चार दिन में कोई समझौता नहीं किया तो यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा। इसके लिए एनएच बाधित करना पड़ा तो उससे भी कोई गुरेज नहीं करेंगे। सीपीआईएम के नेता प्रेम चंदेल और रामकृष्ण शर्मा ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। कहा कि यह आंदोलनकारी शांतिप्रिय ढंग से अपनी मांगे मनवाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। लेकिन कंपनी ने पुलिस बल का सहारा लेकर इन्हें इन आंदोलनकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। यह कंपनी की तानाशाही रवैये को दर्शाता है।
कंपनी परिसर में नहीं कर सकते आंदोलन
जिला पुलिस अधीक्षक अंजुम आर ने बताया कि अर्की न्यायालय ने वर्ष 2012 में आदेश जारी किए हैं कि कोई भी व्यक्ति या संस्था कंपनी परिसर में किसी भी तरह का आंदोलन नहीं कर सकते। कंपनी की शिकायत के बाद इन आदेशों की पालना करते हुए। पुलिस ने तय नियमों के तहत कार्रवाई की है।