अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अर्की पहुंचते ही कांग्रेस के सभी धड़े एकजुट नजर आए। लेकिन सार्वजनिक मंच पर दूरियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई। वीरभद्र सिंह के यहां से चुनाव लड़ने के ऐलान ने कांग्रेसी नेताओं को अचरज में डाल दिया है। लेकिन यहां नेताओं के पास वीरभद्र के पक्ष में प्रचार करने के अलावा दूसरा विकल्प भी नहीं है।
शुक्रवार को वीरभद्र के जनसमूह जुटाने में इन नेताओं ने प्रयास किए हैं। कांग्रेस अर्की में पिछले दो विधानसभा चुनाव से हारती आ रही थी। इसका सबसे बड़ा कारण आपसी फूट को माना जाता रहा। इस बार भी 12 आवेदकों ने टिकट मांगी थी। लेकिन एक धड़ा मुख्यमंत्री को लगातार अर्की से चुनाव लड़ने का न्योता दे रहा था। इस धड़े के भी साफ इशारे थे कि यदि वीरभद्र अर्की की जगह कहीं और से चुनाव लड़ते हैं तो फिर इसी धड़े से किसी दावेदार को मैदान में उतारा जाए।
वीरभद्र सिंह कांग्रेस की इसी अंतर्कलह को दूर करने के मकसद से अर्की से चुनाव मैदान में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री ने अर्की में दाखिल होने से पहले यहां के सारे हालात का जायजा भी ले लिया था। यही वजह रही जो उन्होंने जनसभा के मंच से ही अर्की की गाड़ी पांच चालकों के हाथ में होने और इसकी वजह से कांग्रेस हारने जैसा बड़ा बयान सार्वजनिक रूप से दे दिया। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दोनों बागी उम्मीदवार 31 प्रतिशत वोट हासिल कर गए थे। जबकि करीब 29 प्रतिशत वोट हासिल कर भाजपा ने यहां से सीट जीत ली थी। कांग्रेस को 26 प्रतिशत वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। ये सारे आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में ही जाते हैं। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अर्की से चुनाव लड़ते हैं तो सभी धड़े एकजुट हो जाएंगे। बहरहाल, कांग्रेस की एकजुटता मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ-साथ पार्टी के लिए भी मायने रखती है। लेकिन देखने वाली बात यही होगी कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के खेमे अलग-अलग प्रचार करेंगे या एकजुट होकर समर्थकों से वोट मांगेंगे।