नाहन (सिरमौर)। आज महिलाओं को खुद को बदलने की जरूरत है। अत्याचार सहने से अच्छा है कि इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें। आज सभी स्वतंत्र हैं फिर भी अधिकांश महिलाएं खुद को बदलना ही नहीं चाहतीं। दूसरों को अपनी ढाल बनाने से बेहतर यही है कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। समाज की हर चुनौती का डटकर सामना करें।
आस्था वेलफेयर सोसायटी के अधीन नाहन में चल रहे डीएड कॉलेज में ‘अमर उजाला’ के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान में मार्शल आर्ट के राष्ट्रीय प्रशिक्षक जावेद उल्फत ने कही। राष्ट्रीय प्रशिक्षक एवं नोबल अर्थ ह्यूमन राइट आर्गेनाइजेशन के महासचिव जावेद उल्फत ने महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ मानवाधिकार के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कॉलेज प्रशिक्षुओं और महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए गए।
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले भी कई महिलाओं ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज किया। ज्योतिभा फूले, रानी लक्ष्मी बाई, रजिया सुल्तान सरीखे कई महिलाएं कमजोर नहीं थीं लेकिन अपने दम पर समाज को बदलने का प्रयास किया। आजादी के बाद भी कई महिलाएं ऐसी हैं जो खुद को नहीं बदलना चाहतीं। यदि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग नहीं होंगी तो महिला सशक्तीकरण के लिए चलाई गई मुहिम भी बेअसर है। किसी के साथ गलत हो रहा है तो पहले उसे ही पहल करनी होगी। दूसरे भी उसका तभी साथ देंगे। कभी भी महिलाएं खुद को कमजोर न समझें। हर स्थिति एवं परिस्थिति का इस तरह से मुकाबला करें कि वह मिसाल बन जाए।
जावेद ने कहा कि भारतवर्ष में महिलाओं को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी उनके अधिकार दिए गए हैं। जरूरत है तो सिर्फ इन अधिकार के लिए स्वयं लड़ाई लड़ने की और खुद की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की। यह क्षमताएं सभी महिलाओं में है, बस इसे पहचानने की आवश्यकता है। उन्होंने मानवाधिकार दिवस पर भी महिलाओं को बारीकी से जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि आज इसकी बेहद आवश्यकता है। महिलाओं ने भी आत्मरक्षा की बारीकियों को समझा और करके दिखाया।
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ये रहे मौजूद
अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान में डीएड कॉलेज की प्रधानाचार्य रूचि कोटिया, आस्था स्कूल के प्रधानाचार्य कर्म सिंह, डे-केयर सेंटर की प्रबंधक अर्चना सैनी समेत कॉलेज और स्कूल का स्टाफ, प्रशिक्षु और महिलाएं मौजूद रहीं।
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किसने क्या कहा...
1. प्रशिक्षु सोनाक्षी ठाकुर ने कहा कि डर की वजह से लड़कियां कई बार हालात का मुकाबला नहीं कर पाती हैं। ‘अमर उजाला’ के इस कार्यशाला से आत्मविश्वास बढ़ा है।
2. प्रशिक्षु कमलेश ठाकुर ने कहा कि कार्यक्रम बहुत अच्छा रहा। मानवाधिकार को लेकर कई नई बातें सीखने को मिलीं, जिससे आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई।
3. प्रशिक्षु ममता ठाकुर ने कहा कि मार्शल आर्ट की जो मौलिक जानकारी दी गई, उससे प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में आसानी होगी। कई बातें बहुत ही आसान तरीके से समझाई गईं।
4. प्रशिक्षु नीलिशा कश्यप ने कहा कि पहली बार मार्शल आर्ट और मानवाधिकार विषय पर कार्यशाला में शामिल हुई। कार्यक्रम के दौरान उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी रोचक ढंग से प्रदान की।
5. शिक्षिका मीनाक्षी ठाकुर ने कहा कि कार्यक्रम की मदद से हमें अपनी रक्षा और सुरक्षा के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इस तरह पहले कभी कार्यक्रम नहीं हुआ। आगे भी ऐसे कार्यक्रम हों।
6. शिक्षिका मोनिका शर्मा ने कहा कि बिना किसी हथियार के हम मानसिक रूप से सशक्त बनकर कैसे खुद अपनी रक्षा कर सकते हैं, इस कार्यक्रम से सीखा। महिला सशक्तीकरण व मानवाधिकार पर दी जानकारी अविस्मरणीय रही।