ग्रामीण विद्या उपासक सिरमौर के प्रधान माया राम शर्मा ने कहा कि 15 मई 2003 पहले कार्यरत सरकारी कर्मियों को पेंशन व भविष्य निधि का लाभ प्रदान किया जाना चाहिए। ग्रामीण विद्या उपासकों (अब जेबीटी) कर्मचारियों को उनका हक मिलना जरूरी है।
मांगों को लेकर एक लिखित पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। मांगे पूरी नहीं की गई तो मजबूरन अपने अधिकार के लिए संघर्ष करेंगे। जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। माया राम शर्मा ने रविवार देर शाम को लोनिवि पांवटा विश्राम गृह में आयोजित बैठक में संबोधित किया।
ग्रामीण विद्या उपासक संघ (नियमित कनिष्ठ बुनियादी अध्यापक) की जिला इकाई की बैठक में अध्यक्ष माया राम शर्मा, जय प्रकाश, अनिल तोमर व मदन शर्मा ने कहा कि हक के लिए संघर्ष होगा। वर्ष 2002 में ग्रामीण विद्या उपासक योजना में 1350 अध्यापक प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में सेवारत हैं। जो प्रदेश के बेहद दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने अगस्त 2011 को ग्रामीण विद्या उपासकों को नियमित कर कनिष्ठ अध्यापक (जेबीटी) पद पर नियुक्ति भी कर दी है लेकिन पेंशन व जीपीएफ का हकदार नहीं माना गया। सरकारी आदेशानुसार वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखा है जो सरकारी कर्मचारियों के साथ सरासर अन्याय है। इससे सेवानिवृत्ति के बाद इन कर्मचारियों को असहायों की तरह जीवन यापन करना पड़ेगा। ग्रामीण विद्या उपासक भर्ती वर्ष 2002 में हुई है। बैठक में प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग से नियमित कनिष्ठ बुनियादी अध्यापकों को नियमितीकरण के उपरांत से पेंशन व जीपीएफ प्रदान किया जाए।
इस अवसर पर मदन शर्मा, अभिषेक शर्मा, जेपी शर्मा, माया राम, बबली चौहान, कांता तोमर, अनिल तोमर, राजेंद्र चौहान, धनबीर चौहान, अर्चना देवी व रक्षा आदि मौजूद रहीं।