पांवटा साहिब के जमीन विवाद में निचली अदालत के फैसले में आंशिक संशोधन
क्रॉस ऑब्जेक्शन स्वीकार कर दो अन्य बेटों को जमीन पर स्थायी निषेधाज्ञा का मिला लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। पांवटा साहिब क्षेत्र में पैतृक जमीन को लेकर वर्षों से चल रहे पारिवारिक विवाद में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने मलकीत सिंह की सिविल अपील खारिज कर दी। वहीं, धनबीर सिंह और धनपत राय की क्रॉस ऑब्जेक्शन को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के कुछ निष्कर्षों में संशोधन किया गया। अदालत ने जमीन के संबंध में निचली अदालत की ओर से जारी स्थायी निषेधाज्ञा को बरकरार रखते हुए प्रतिवादी को संपत्ति में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोक दिया।
मामला वरिष्ठ सिविल जज, पांवटा साहिब की ओर से 28 अक्तूबर 2024 को सुनाए फैसले से जुड़ा था। वादियों का आरोप था कि विवादित जमीन पैतृक संपत्ति है, इसलिए उनके पिता राम प्रसाद पूरी संपत्ति को अपनी इच्छा से वसीयत नहीं कर सकते थे। उन्होंने 27 दिसंबर 2006 को राम प्रसाद की ओर से मलकीत सिंह के पक्ष में की वसीयत को संदिग्ध और अवैध बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी। दूसरी ओर, मलकीत सिंह का पक्ष था कि उनके पिता ने स्वस्थ मानसिक स्थिति में स्वतंत्र इच्छा से उनके पक्ष में वसीयत की थी।
अदालत ने पाया कि राम प्रसाद ने जमीन पिता देवी चंद से विरासत में प्राप्त की थी। ऐसे में उनके बेटों के संबंध में यह पैतृक सहदायिक संपत्ति थी। हालांकि, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति के पैतृक या सहदायिक होने मात्र से पुरुष हिंदू को वसीयत करने की क्षमता से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि राम प्रसाद के पास वसीयत करने की कानूनी क्षमता थी। इसके बावजूद अदालत ने 27 दिसंबर 2006 की वसीयत को वैध नहीं माना। फैसले में कहा कि वसीयत कई संदिग्ध परिस्थितियों से घिरी हुई थी और इसे वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।