स्थानीय विधायक चौधरी किरनेश जंग की अध्यक्षता में पंजाबी अध्यापकों का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला। पंजाबी अध्यापक सरकारी स्कूलों में पीरियड आधार पर नियुक्त हैं। शिक्षा विभाग के माध्यम से उन्हें नियुक्ति दी गई है। अब नियुक्त अध्यापकों ने ठोस नीति बनाने और उन्हें नियमित करने की मांग की है। राज्य पंजाबी अध्यापक संघ की उपाध्यक्ष जसकीरत कौर चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री से मांग को प्राथमिकता से पूरा करने का आग्रह किया गया है। सोमवार को स्थानीय विधायक की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला है। इसमें पिछले करीब 6 वर्षों से सरकारी स्कूलों में कार्यरत पंजाबी अध्यापकों को नियमित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग रखी गई। पंजाबी अध्यापकों की पैरवी करने वालों में पांवटा दून विस क्षेत्र के विधायक चौधरी किरनेश जंग, पांवटा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के उप प्रधान हरभजन सिंह, मुख्य प्रबंधक कुलवंत सिंह, पंजाबी बिरादरी पांवटा इकाई प्रधान जसबीर सिंह साहनी, मुख्य सचिव डॉ. प्रहलाद सिंह चौधरी ने सरकारी स्कूल में कार्यरत पंजाबी अध्यापकों की मांग को जायज ठहराते हुए मुख्यमंत्री से ठोस नीति बनाने और इनको नियमित करने का आग्रह किया है।
उधर, सिरमौर पंजाबी युवा मंच पांवटा इकाई अध्यक्ष जरनैल सिंह और महासचिव अच्छर सिंह ने बताया कि पांवटा दौरे के दौरान सीएम हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें बेरोजगार पंजाबी अध्यापकों की नियुक्ति नियम 2010 के तहत करने की मांग रखी गई है। मंच के सदस्यों परविंद्र सिंह, श्याम लाल, सुरेश कुमार, संजय कुमार, करनैल सिंह, अनुरानी, आशा देवी, संगत कौर और अच्छर सिंह ने बताया कि शीघ्र पंजाबी अध्यापकों की भर्ती की जाए।
कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में आने से पहले अल्पसंख्यक समुदय के लोगों को पंजाबी-उर्दू के 100-100 पद भरने का वादा किया था लेकिन, चार वर्षों के बाद भी प्रशिक्षित पंजाबी अध्यापक बेरोजगार घूम रहे हैं। सिरमौर पंजाबी युवा मंच पांवटा अध्यक्ष जरनैल सिंह ने कहा कि वर्ष 2015 में टेट द्वारा आवेदन मांगे गए थे लेकिन, सरकार के पास इन भाषाओं का सिलेबस नही होने के कारण भर्ती ही नहीं हो सकी थी। इसलिए सीएम के पांवटा प्रवास के दौरान ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें नियम-2010 के तहत पंजाबी अध्यापकों की भर्ती की मांग उठाई गई है।