सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में सरकारी स्कूलों में नियमित विशेष शिक्षक भर्ती के दिए हैं आदेश
-हिमाचल में शुरू नहीं हुई नियमित भर्ती प्रक्रिया, विशेष शिक्षकों में रोष
-नौकरी के आस में अब ओवरऐज होने लगे विशेष शिक्षक, भविष्य अधंकार में
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियमित विशेष शिक्षकों की तैनाती न होने के कारण राज्य के अधिकतर स्कूलों मेंं विशेष बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2021 के अपने एक फैसल में आदेश दिए कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को सभी सरकारी स्कूलों में एक विशेष शिक्षक की नियमित भर्ती के आदेश दिए थे। राज्यस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़ ने इन आदेशों को अमली जामा पहना दिया है, जबकि झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हिमाचल में भी प्रक्रिया शुरू न होने से विशेष शिक्षकों में रोष पनपा हुआ है।
एक आरटीआई के जवाब में प्रदेश सरकार ने 6 महीने में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी, जिसकी अवधि फरवरी में पूरे हो चुके हैं। इससे हर प्रकार की योग्यता रखने वाले विशेष शिक्षक निराश हैं, कईयों की आयु तो 50 को पार कर चुकी है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 मेंं 21 प्रकार दिव्यांगताओं को वर्णन किया गया है, जबकि स्कूलों में चार से पांच प्रकार की दिव्यांगता को ही शामिल किया है। यदि विशेष शिक्षकों की नियमित भर्ती होती है तो सभी 21 प्रकार के दिव्यांगजनों को शिक्षा का अधिकार मिल सकता है। इसके अलावा जो विशेष शिक्षक चंद रुपयों में अपने घर से मीलों दूर कम पैसों में नौकरी कर रहे हैं उनका भविष्य भी संवर सकता है।
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1. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को विशेष शिक्षकों की नियमित भर्ती के आदेश दिए हैं, हिमाचल में यह भर्ती न होने से उनका भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है। - कर्म सिंह
2. नियमानुसार प्राइमरी स्कूलों में 10 दिव्यांग बच्चों पर एक और अपर प्राइमरी में 15 दिव्यांग बच्चों को एक विशेष शिक्षक की भर्ती अनिवार्य है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। - मोनिका शर्मा
3. बहुत से विशेष शिक्षक अपने घर से मीलों दूर प्राइवेट नौकरी में धक्के खा रहे हैं, उनको नाममात्र का वेतन नसीब हो रहा है।संतोष कुमारी
4. कई बेरोजगार विशेष शिक्षकों की उम्र 50 के पार पहुंच चुकी है। नौकरी की आस में वह बूढ़े हो रहे हैं। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अविलंब पालन करके नियमित भर्ती निकालनी चाहिए। - किरण तोमर