आज के कार्यक्रम की खबर
-देव पालकी की शोभायात्रा को रवाना कर उपायुक्त ने किया शुभारंभ
-घोषणा के बावजूद लोगों को अभी भी राज्य स्तरीय दर्जे का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। उपमंडल मुख्यालय राजगढ़ में मंगलवार को तीन दिवसीय जिला स्तरीय शिरगुल देवता बैसाखी मेला पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ शुरू हो गया। मेले का शुभारंभ उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने देवता की पालकी की शोभायात्रा को रवाना करके किया।
सुबह मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शिरगुल देवता को भव्य पालकी में विराजमान कर पारंपरिक देव जातर (शोभायात्रा) निकाली गई। शोभायात्रा शिरगुल मंदिर से प्रारंभ होकर पुराना बस अड्डा, नया बस अड्डा, सब्जी मंडी और हाब्बन मार्ग से होते हुए पूरे शहर की परिक्रमा कर नेहरू मैदान पहुंची।
नेहरू मैदान में पहुंचने पर देवता ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया, जिसके बाद जातर पुनः मंदिर की ओर रवाना हुई। शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर देवता का भव्य स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए हलवा, आइसक्रीम और शीतल पेयजल का वितरण भी किया गया। इस वर्ष मेले में एक नई परंपरा देखने को मिली, जिसमें शोभायात्रा के साथ आकर्षक देव झांकियां निकाली गईं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
तीन दिन तक चलने वाले इस मेले में धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मेले के दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों की ओर से रंगारंग प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें डीएवी, एसवीएन, राजकीय प्राथमिक पाठशाला, सरस्वती कला मंच और चेष्टा कला मंच के कलाकारों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इससे पहले एसडीएम राजगढ़ एवं मेला समिति के अध्यक्ष राजकुमार ठाकुर ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और मेले के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान उपायुक्त को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक रीना कश्यप ने भी मंदिर में माथा टेका और शोभायात्रा में भाग लिया। उन्होंने शिरगुल देवता के जयकारे लगाकर श्रद्धा व्यक्त की।
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राज्य स्तरीय दर्जे का इंतजार जारी
गत वर्ष उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस मेले को राज्य स्तरीय दर्जा देने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इस कारण स्थानीय लोगों में निराशा बनी हुई है। इस वर्ष भी मेला जिला स्तरीय ही आयोजित किया गया। बता दें कि करीब 70 वर्षों से आयोजित हो रहा राजगढ़ का यह मेला क्षेत्र का सबसे प्राचीन मेला माना जाता है। बैसाख माह में आयोजित होने के कारण इसे स्थानीय भाषा में बिशु मेला भी कहा जाता है। संवाद