दस हजार से अधिक आबादी को जोड़ने के लिए बनी डीपीआर, तीन वर्ष से मंजूरी का इंतजार
जल शक्ति विभाग ने 42 करोड़ की डीपीआर भेजी, अब तक बजट स्वीकृत नहीं
पांवटा शहर में दो चरण शुरू, ग्रामीण क्षेत्रों की बारी आते ही योजना ठप
माजरा, मेलियों, मिश्रवाला समेत कई पंचायतें सीवरेज सुविधा से अभी भी दूर
संजय कंवर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। माजरा और आसपास की पंचायतों को सीवरेज सुविधा से जोड़ने की तीन वर्ष पुरानी योजना कागजों से बाहर नहीं आ सकी है। नमामी गंगे परियोजना के तहत प्रस्तावित योजना करीब दस हजार से अधिक आबादी को जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। जल शक्ति विभाग की ओर से डीपीआर तो बना कर भेज दी गई, लेकिन आज तक बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है।
पांवटा साहिब शहरी क्षेत्र में सीवरेज योजना के तीन चरणों में से दो चरण शुरू हो चुके हैं। तीसरे चरण में कुछ क्षेत्रों को जोड़ा जा चुका है। शहरी क्षेत्र के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों को भी सीवरेज सुविधा देने का प्रस्ताव था। इसमें ग्राम पंचायत माजरा, मेलियों, मिश्रवाला, जगतपुर, मटक माजरी, क्यारदा सहित आसपास के गांव शामिल किए जाने थे।
जल शक्ति विभाग पांवटा मंडल कार्यालय ने करीब 42 करोड़ रुपये की योजना की डीपीआर तैयार कर तीन वर्ष पहले केंद्र को भेजी थी। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की दस हजार से अधिक जनसंख्या को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा था। जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता पांवटा साहिब जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि डीपीआर नमामी गंगे परियोजना के तहत भेजी गई है, लेकिन अब तक योजना के लिए बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है।