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जनजातीय दर्जा देने से पहले एससी समुदाय के अधिकारों का हो संरक्षण

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गिरिपार अनुसू चित जाति अधिकार संरक्षण समिति के बैनर तले शिलाई में जुटे लोग। संवाद - फोटो : NAHAN
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शिलाई (सिरमौर)। गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने से पहले यदि इस क्षेत्र की 40 प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों का संरक्षण नहीं किया गया तो हम चुप नहीं बैठेंगे। सभी अनुसूचित जातियां इस मुद्दे पर एकमत हैं। शिलाई में आज उमड़ी यह भीड़ इस बात की गवाह है।
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यह बात शिलाई में आक्रोश रैली के दौरान गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति के प्रधान अनिल मंगेट ने कही। समिति के बैनर तले सोमवार को शिलाई में आक्रोश रैली का आयोजन किया गया जिसमें भारी संख्या में भीड़ जुटी।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अनिल मंगेट ने कहा कि गिरिपार को जनजातीय घोषित करने से अनुसूचित जाति वर्ग को पंचायत रोस्टर में नुकसान होगा। एट्रोसिटी एक्ट खत्म होने से अनुसूचित जाति वर्ग पर अत्याचार बढ़ेंगे। यह हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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रैली के दौरान एक दर्जन से अधिक वक्ताओं ने अपना संबोधन दिया। इस दौरान वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि पहले अनुसूचित जाति के अधिकार सुरक्षित करने का प्रयास करें फिर जनजातीय दर्जे के बारे में सोचें।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर नेताओं का सहयोग नहीं मिला तो उनको सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर हाटी समिति को खुले मंच पर चर्चा करने की भी चुनौती दी। वक्ताओं ने कहा कि हम संविधान को मानने वाले शांतिप्रिय लोग हैं लेकिन अधिकारों पर बात आई तो हम चुप नहीं बैठेंगे। यह बात नेताओं को भी समझ लेनी चाहिए।
रैली के बाद समिति ने एसडीएम शिलाई के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भी प्रेषित किया। इसमें गिरिपार को जनजातीय दर्जा देने से पहले एससी वर्ग के अधिकार सुरक्षित करने की बात कही गई। इस अवसर पर सुरेंद्र धर्मा, तुलसी राम नींटा, सुनील वर्मा, प्रदीप भारतीय सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
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