नाहन के एक डिपो में राशन की खरीदारी करता व्यक्ति।
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नाहन (सिरमौर)। कोरोनाकाल में आम लोगों की आर्थिक हालत पतली हो गई है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक संकट में है। उस पर महंगाई के बोझ ने मध्यम वर्ग और गरीबों की कमर तोड़ कर रख दी है। सरसों तेल की कीमत आसमान छू रही है। ऐसे में सरकार से राहत की उम्मीद थी लेकिन सरकारी डिपुओं में भी सरसों तेल सस्ता नहीं हुआ।
दुकान में मिलने वाले सरसों तेल और डिपो के तेल में का एक समान मूल्य हैं। हां, कुछ चुनिंदा कंपनियों का सरसों तेल बाजार में जरूर दस से 20 रुपये तक महंगा हुआ है लेकिन सामान्य सरसों तेल की कीमत एक समान है।
‘अमर उजाला’ ने बाजार में सरसों तेल की कीमतों का आकलन किया तो पाया कि बाजार की दुकानों और डिपो में मिलने वाले सरसों तेल में ज्यादा अंतर नहीं है। कई कंपनियों के तेल की कीमत और डिपो के तेल की कीमत एक समान है।
डिपो में एपीएल को 160 और बीपीएल के लिए 155 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से सरसों तेल दिया जा रहा है। रिफाइंड की कीमत एपीएल के लिए 109 और बीपीएल के लिए 104 रुपये निर्धारित की गई है। बाजार में सरसों तेल गगन मार्का 160, पी मार्का 180, मशाल 180 और 555 मार्का 160 रुपये में मिल रहा है।
पतंजलि का सरसों तेल सबसे अधिक 190 रुपये की कीमत में बेचा जा रहा है। बाजार में रिफाइंड किंग्स सोया 140 से 150 रुपये में मिल रहा है। डिपो और दुकान के तेल में खास अंतर नहीं होने के कारण लोग डिपो की अपेक्षा दुकान के तेल को अधिक तबज्जो दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोरोना संकट के इस दौर में सरकार को राहत प्रदान करनी चाहिए थी लेकिन सरसों तेल की कीमत बढ़ाकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल दिया है।
आशीष गुप्ता ने बताया कि सरकार आम जनता के लिए कुछ नहीं कर पा रही। जनता कर्ज के बोझ तले दबी हुई है। गृहिणी सुनीता, मोनिका तोमर, देवयंती ठाकुर, अर्चना गर्ग ने कहा कि कोरोना संकट के इस दौर में लोग आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार को महंगाई पर नियंत्रण कर खाद्य पदार्थों के दाम कम करने चाहिए। कम से कम डिपो में सामान सस्ता मिलना चाहिए।