नाहन/राजगढ़ (सिरमौर)। बडू साहिब इटरनल यूनिवर्सिटी में आयोजित भारतीय शिक्षा-चुनौतियां व अवसर पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दूसरे दिन रविवार को भी व्यापक विचार मंथन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिन भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए कुलपतियों, प्राचार्यो और शिक्षकों ने अपने महत्वपूर्ण विचार प्रकट किए।
रविवार को डा. प्रतीक्षा मंडल मुख्य अतिथि रहीं। इस दौरान डा. प्रदीप चौधरी ने माध्यमिक शिक्षा पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। देव समाज विश्वविद्यालय के प्राचार्य डा. अमर शर्मा ने दर्शनशास्त्र के बारे में सभी को अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि यह विषय क्लास रूम में नहीं सीखा जा सकता, यह मूल रूप से तथ्यों पर आधारित है। डॉ. अंग्रेज गिल ने ऑनलाइन प्रस्तुति दी एवं माध्यमिक शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर दिया। डॉ सुमित ने अर्थशास्त्र के विषय पर प्रकाश डाला और बताया कि हमारी अर्थव्यवस्था में विभिन्न स्त्रोतों है जो कि शिक्षा प्रणाली के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक व्यय शिक्षा पर किया जाता है ।
सम्मेलन के दौरान उत्कृष्ट शोध पत्रों को पुरस्कृत भी किया गया। बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुनीता सिंह ने ऑनलाइन प्रस्तुति दी। इन्होंने माध्यमिक शिक्षा में भाषा और शिक्षा के ऊपर जोर दिया और बहु भाषा को बढ़ावा देने की बात की। प्रोफेसर सैय्यद ने 21वीं सदी में तकनीक के ऊपर ज्यादा जोर डालते हुए इसका महत्व बताया एवं शिक्षा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ाने पर जोर दिया। डॉ विद्या नागपाल ने समानता और हिस्सेदारी पर बातचीत करते हुए अपने अनुभवों को सांझा किया।
इस मौके पर डा. नीलम कौर, डॉ देवेंद्र सिंह, डॉ एचएस धालीवाल, डॉ हरप्रीत कौर, डॉ बीएस बोपाराय डॉ डीके शर्मा, विश्वविद्यालय के सहायक कुलपति डॉ अमरीक सिंह अहलूवालिया एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
तन्हा