ददाहू (सिरमौर)। पारंपरिक देव विदाई के साथ ही पिछले 5 दिनों से चला आ रहा अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेला सोमवार को संपन्न हो गया। महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत समापन समारोह के मुख्य अतिथि रहे। महामहिम ने सोमवार दोपहर बाद देवताओं की पालकी को कंधा देकर उन्हें विदा किया। इसके साथ ही रेणुका पधारे देवता अपने देवस्थलों को प्रस्थान कर गए।
प्राकृतिक लोक वाद्य यंत्रों, शंख-घंटियाल व ढोल-नगाड़ों से माहौल भक्तिमय हो गया। मिलन के बाद विदाई के यह पल भाव-विभोर करने वाले थे। महामहिम राज्यपाल ने मंदिर परिसर में स्वयं हवन यज्ञ का आयोजन करके एक नई परंपरा को कायम किया तथा जिला के अधिकारियों से हवन यज्ञ में पूर्णाहुति प्रदान करते हुए चारों वेदों में स्थित वैदिक मंत्रों से करवाई गई पूजा का महत्व भी समझाया।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में हवन ही पूजा पद्धति का मुख्य अंश था। हवन से हमारे दुख व पाप का हरण होता है तथा सुख, शक्ति व स्मृति का संचार होता है। इसके पश्चात रेणु मंच पर जनता को संबोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस धरती पर रहते हैं जहां देवता वास करते हैं। हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं की धरती है जहां मेले और त्योहारों का अलग ऊंचा महत्व है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां ऊंची-ऊंची पहाड़ियां व हरे भरे पर्वत शिखर हैं ऐसा ही ऊंचा विकास प्रदेश का होना चाहिए। प्रदेश में रहने वाले लोगों के विचार व चिंताएं भी शिखर की तरफ ऊंची होनी चाहिए जिससे कि हम प्रदेश को देशभर में एक आदर्श राज्य बना सके। पूरे प्रदेश को आदर्श राज्य बनाना कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं है। मां रेणुका व भगवान परशुराम का भी हमारे शास्त्रों व संस्कृति में एक बहुत बड़ा योगदान है जिसको लेकर हमें भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने का प्रण लेना चाहिए। इस मौके पर सीपीएस विनय कुमार, डीसी बीसी बडालिया, एसपी सौम्या साम्बशिवन, कंवर अजय बहादुर सिंह, एडीसी हरबंस नेगी सहित जिला के आला अधिकारी मौजूद रहे।