डॉ. दीनदयाल वर्मा के काव्य नाटक प्रेम पुष्प.., का आकाशवाणी से होगा प्रसारण
प्रेम पुष्प नाटक में महात्मा बुद्ध के जीवन को पांच भागों में किया गया है व्यक्त
खूबी यह कि किसी भी भाग का स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है मंचन
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार व नाहन निवासी डॉ. दीन दयाल वर्मा के महात्मा बुद्ध के जीवन पर लिखे नाटक प्रेम पुष्प.., का प्रसार भारती आकाशवाणी शिमला से प्रसारण किया जाएगा। इस नाटक की 18 दिसंबर को रिकाॅर्डिंग पूरी हो चुकी है। इसे अब 24 दिसंबर को प्रसारित किया जाएगा।
गौरतलब रहे कि डॉ. दीनदयाल वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। वह कहानी, व्यंग्य, संस्मरण, यात्रा वृत्त और कविता विद्या में निरंतर लेखन कर रहे हैं। दीनदयाल वर्मा हिंदी साहित्य के प्रसार- प्रचार के लिए अभी तक पंद्रह हजार से अधिक पुस्तकों का नि:शुल्क वितरण कर चुके हैं।
प्रेम पुष्प.., नाटक को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए लेखक ने कुछ हद तक कल्पना का भी सहारा लिया है। इसके साथ ही बौद्ध धर्म से संबंधित विभिन्न ग्रंथों और संदर्भों की भी मदद ली है। इस नाटक का संपादन लेखक और चित्रकार दीपराज विश्वास ने किया है।
बुद्ध की कथाओं, उप कथाओं ने भारत को ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व को प्रेरित आंदोलित और आनंदित किया है। हिंदी रंगमंच, प्रेम, सामाजिक समरसता, महिला अधिकारों पर रचे इस काव्य नाटक का समुचित मूल्यांकन करने के बाद आकाशवाणी के शिमला केंद्र ने इसे प्रसारित करने का निश्चय लिया है।
उल्लेखनीय है कि 2023 में आत्मकथात्मक उपन्यास जंगली क्वार्टर के प्रकाशन के बाद प्रकृति पर 414 कविताओं का एक वृहत एवं चर्चित काव्य संग्रह प्रकृति के पन्नों से.., प्रकाशित हुआ है। एक कहानी संग्रह प्रकृति के रंग.., जैसी पुस्तक का प्रकाशन करने के बाद लेखक ने इस नाटक की रचना की है जो कि रंगमंच के कलाकारों के साथ-साथ सभी के लिए पठनीय पुस्तक है।
लेखक ने काव्य शैली में प्रस्तुत नाटक में पात्रों के संवादों को साधारण बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करते हुए बहुत ही सरल एवं सरस बनाने का भरपूर प्रयास किया है। यह काव्य नाटिका पांच भागों में लिखी गई है, 1 प्रेम पुष्प, 2 गृह त्याग, 3 अस्पृश्य को प्रव्रज्या, 4 नारी को अवसर, 5 अंगुलिमाल, लेकिन इसकी यह विशेषता है कि मंचन करते समय इसके किसी भी अंक का मंचन स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है। इससे पहले लेखक ने गुरु दक्षिणा नाटक.., की रचना की थी। इसके 9 अंक प्रकाशित हो चुके हैं। इसका अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया है और यह नाटक भी आकाशवाणी से कई बार प्रसारित हो चुका है।
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