तीन साल में यहां न टाइगर आए और न ही बाड़े का हो पाया निर्माण
वन्य प्राणी विभाग के टाइगर लाने के दावे धरातल पर हो रहे ठुस्स
आज तक जितनी योजनाएं लागू की, उन्होंने भी तोड़ दिया दम
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। रेणुकाजी में टाइगर लाने के वन्य प्राणी विभाग के सभी दावे ठुस्स होकर रह गए हैं। विभागीय दावों के बीच मिनी जू रेणुकाजी में टाइगर देखने के लिए लोगों की आंखें पथरा गईं हैं, लेकिन टाइगर आने की दूर-दूर तक आहट भी नहीं सुन पा रही है।
बता दें कि विभाग ने पहली नवंबर को मुख्यमंत्री के हाथों टाइगर के जोड़े का अनावरण करने का दावा किया था, लेकिन लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी यहां टाइगर लाना तो दूर टाइगर के बाड़े का निर्माण तक पूरा नहीं हो सका है। जबकि बाड़े पर डेढ़ करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि व्यय की जा रही है।
बता दें कि मिनी जू रेणुकाजी में वन्य प्राणी विभाग की कोई भी योजना आज तक सिरे नहीं चढ़ सकी है। दशकों पूर्व यहां एकमात्र लायन सफारी को बंद कर दिया गया था। उसके बाद यहां कैमल कट (ऊंट गाड़ी) को भी पर्यटकों को घूमने के लिए लाया गया, लेकिन कुछ समय बाद ही ऊंट की मौत हो गई। उसके बाद लाखों रुपये खर्च करके बैटरी युक्त दो वाहनों (रौयला कार) से अभयारण्य की सैर करवाने के लिए लाया गया, लेकिन उन्हें भी नष्ट कर दिया गया।
इसके बाद दो ई-रिक्शा को भी परिक्रमा मार्ग पर संचालित किया गया था लेकिन अब उन्हें भी खड़ा कर दिया गया। यही नहीं, ट्रैकर्स के लिए लाई गई 10 साइकिलों को भी विभाग के कर्मचारी ही चला रहे हैं।
अब पर्यटकों के आकर्षण के लिए टाइगर का नया जोड़ा लाने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है। इससे पर्यटकों को भारी निराशा हाथ लग रही है। बजट के अभाव में तीन साल से टाइगर के बाड़े का निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस कारण टाइगर के जोड़े को रेणुका नहीं लाया गया है और विभाग के सभी दावे भी खोखले साबित हो रहे हैं।
वन्य प्राणी विभाग की अरण्यपाल (सीएफ) प्रीति भंडारी ने बताया कि प्रशासनिक अड़चनों के चलते टाइगर के जोड़े को रेणुका नहीं लाया जा सका है। बाड़े का निर्माण लगभग पूर्ण कर लिया गया है। 31 मार्च से तक टाइगर के जोड़े को रेणुका लाए जाने की योजना है। औपचारिकता पूर्ण होते ही बंगलुरू से टाइगर के जोड़े को रेणुका लाया जाएगा।
-संवाद