(लेखा-जोखा इबारत 2024)
मेडिकल कॉलेज को मिलीं आधुनिक मशीनों से उपचार हुआ सुगम
नेत्र विभाग में फेको इमल्सीफिकेशन मशीन से आंखों की सर्जरी
बच्चों की सुपर स्पेशलिटी ओपीडी, गायनी वार्ड के लिए 20 अतिरिक्त बिस्तर
कूल्ड रेडियो फ्रिक्वेंसी मशीन से माइग्रेन, त्रिनाड़ी दोष रोगियों को राहत
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में वर्ष 2024 में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ी हैं। अस्पताल में जहां रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं व सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास प्रबंधन की ओर से किए गए, वहीं आधुनिक मशीनें भी मेडिकल कॉलेज में स्थापित कर उपचार दिया जा रहा है।
जनवरी महीने में मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में फेको इमल्सीफिकेशन सर्जरी शुरू की गई। वर्ष भर में 900 के करीब मरीजों की सर्जरी की गई। मोतियाबिंद को हटाने के लिए आधुनिक और सुरक्षित इस सर्जरी की सुविधा पहले केवल निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध थी। अब मेडिकल कॉलेज में भी लोगों को फेको सर्जरी का लाभ मिल रहा है। विभाग की एचओडी डॉ. शालू गुप्ता ने बताया कि फेको सर्जरी जटिलताओं के विकास का जोखिम काफी कम कर देती है।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में बच्चों के लिए सुपर स्पेशलिटी ओपीडी सुविधा शुरू की गई। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ और न्यूरो बाल रोग विशेषज्ञ बच्चों के स्वास्थ्य की जांच और उपचार कर रहे हैं। यह ओपीडी एमसीएच ओपीडी से अलग लगाई जा रही है। मेडिकल कॉलेज में गायनी वार्ड में अधिक भीड़ होने के चलते अलग से 20 बिस्तरों का एक वार्ड भी इसी वर्ष स्थापित किया गया।
जिले के अन्य अस्पतालों में गायनी के चिकित्सकों के रिक्त पदों के चलते सारा भार मेडिकल कॉलेज पर रहता था। गायनी वार्ड में पहले केवल 37 बिस्तर की व्यवस्था थी। कई मर्तबा एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों को दाखिल करना पड़ रहा था। इस समस्या से निजात पाने के लिए 20 अतिरिक्त बिस्तर का एक वार्ड तैयार किया गया।
मेडिकल कॉलेज में इसी वर्ष 50 लाख रुपये लागत की अत्याधुनिक कूल्ड फ्रीक्वेंसी मशीन भी स्थापित की गई। इस मशीन के माध्यम से लंबे समय से सिर दर्द, माइग्रेन, त्रिनाड़ी दोष के अलावा कंधों, गर्दन, कमर, कूल्हे के दर्द के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा घुटने के दर्द में यह तकनीक खासी कारगर साबित हो रही है।
इसी तरह मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी के बंद होने का समय शाम 4 बजे से बढ़कर रात 8 बजे तक किया गया। अस्पताल के विभिन्न भवनों में चल रही ओपीडी, प्रयोगशाला, ओटी, पंजीकरण कक्ष को पीजीआई चंडीगढ़ और आईजीएमसी शिमला की तर्ज पर ब्लॉक में मर्ज किया गया। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए पड़ताल केंद्र स्थापित किया गया।
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