एक शिक्षक, पांच कक्षाएं और बच्चे 59, कैसे संवरेगा बच्चों का भविष्य
प्राथमिक स्कूल मानल महल में शैक्षणिक व्यवस्थाएं पूरी तरह से धड़ाम
इकलौता शिक्षक पढ़ाने के साथ-साथ निपटा रहा गैर शैक्षणिक कार्य भी
आधार ही जब होगा कमजोर तो आगे कैसे पढ़ाई कर पाएंगे विद्यार्थी
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। सरकार और शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों को बेहतरीन सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि जिला सिरमौर के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षक भी पूरे नहीं हैं।
प्राथमिक शिक्षा खंड बकरास के अंतर्गत केंद्रीय पाठशाला लोजा के अधीन आने वाली राजकीय प्राथमिक पाठशाला मानल महल भी ऐसे ही बुरे दौर से गुजर रही है। यहां बच्चों का भविष्य संवरने की बजाए अंधकार मेें जाता दिख रहा है। दूसरे स्कूलों की तरह इस स्कूल में भी लंबे समय से स्टाफ की कमी चल रही है। यहां एकमात्र जेबीटी ही कार्यरत है। एकमात्र जेबीटी के भरोसे ही यहां पांच कक्षाएं चल रही हैं। जबकि इस स्कूल में बच्चों की संख्या 59 पहुंच चुकी है।
वर्तमान में मात्र एक जेबीटी शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ मिड-डे मील के भोजन की व्यवस्थाएं करने के साथ-साथ दूसरे कार्यों की कागजी कार्यवाही भी खुद ही निपटाने को विवश है। आलम यह है कि जरूरी काम से छुट्टी पर जाना हो तो समय पर कभी छुट्टी ही नहीं मिलती। कारण.., केंद्रीय पाठशाला लोजा के अंतर्गत आने वाली चार पाठशालाएं एक-एक शिक्षक के ही भरोसे हैं।
ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है मानल महल में पढ़ रहे 59 बच्चों को किस तरह की शिक्षा मिल रही होगी। जब बच्चे का आधार ही कमजोर होगा, तो वह आगे क्या कर पाएगा। इसे आसानी से समझा जा सकता है। जेबीटी बलबीर सिंह ने बताया कि वह किसी तरह व्यवस्थाएं कायम रखने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रांरभिक शिक्षा उपनिदेशक राजीव ठाकुर ने बताया कि सरकार जेबीटी भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है। अब कोर्ट ने भी जेबीटी नियुक्त करने के अनुमति दे दी है। प्रदेश में बहुत जल्द जेबीटी नियुक्त कर दिए जाएंगे। जिन पाठशालाओं में एक भी शिक्षक नहीं है या फिर जो पाठशालाएं एक शिक्षक के भरोसे चल रही हैं वहां जेबीटी नियुक्त करने में प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।
संवाद