मानसून-ये कैसी तैयारी : अभियान
जिले के सिरमौरी ताल के आपदा पीड़ित अब भी राहत के इंतजार में
तीन साल बाद भी नहीं बदले हालात, जमीन बंजर और रास्ते टूटे पड़े
-8 अगस्त 2023 की त्रासदी में एक ही परिवार के पांच लोगों की गई थी जान
राजपाल शर्मा
सतौन (सिरमौर)। जिला सिरमौर के सिरमौरी ताल में 8 अगस्त 2023 को आई आपदा को तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्र के हालात आज भी लगभग वैसे ही बने हुए हैं। आपदा के बाद न तो क्षेत्र के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए गए और न ही प्रभावितों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो पाया है। कई किसानों की उपजाऊ जमीनें आज भी विशालकाय पत्थरों से ढकी पड़ी हैं। बरसात के दिनों में लोगों के मन में उस भयावह रात की यादें ताजा हो जाती हैं।
ग्रामीणों के अनुसार आपदा के दौरान चले दो-तीन दिन के रेस्क्यू अभियान के बाद न तो कोई अधिकारी क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेने पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि। प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था तक नहीं हो पाई है। कई स्थानों पर आज भी बड़े-बड़े पत्थर पड़े हैं, जिन्हें हटाना ग्रामीणों के बस की बात नहीं है।
दरअसल, 8 अगस्त 2023 की रात सिरमौरी ताल बरसात के दौरान आए मलबे और सैलाब ने कुछ ही मिनटों में एक मकान को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुलदीप सिंह, उनकी पत्नी जीतो देवी, बहू रजनी देवी, पोता नितेश और पोती दीपिका की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। परिवार का बेटा विनोद कुमार उस समय गांव के अन्य लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने गया हुआ था, जबकि दूसरा बेटा अमर सिंह नारिवाला में रहता था। आज भी उस त्रासदी के निशान सिरमौरी ताल में साफ दिखाई देते हैं।
स्थानीय निवासी विनोद कुमार ने बताया कि बरसात शुरू होते ही आपदा की भयावह यादें फिर से ताजा हो जाती हैं। बारिश के दौरान वह अधिकतर समय घर से बाहर रहकर हालात पर नजर रखते हैं। काशी राम, मोहन सिंह और राजेंद्र ने बताया कि उनकी कई बीघा उपजाऊ भूमि आपदा की भेंट चढ़ गई। कांशी राम ने कहा कि उनकी 18 बीघा जमीन में से करीब 10 बीघा भूमि आज भी बड़े-बड़े पत्थरों से भरी हुई है, जिससे खेती करना संभव नहीं हो पा रहा है।
मोहन सिंह ने बताया कि आपदा के बाद उन्हें बैंक से ऋण लेकर नारिवाला में मकान बनाना पड़ा। हालांकि खेतीबाड़ी और मवेशियों की देखभाल के लिए उन्हें नियमित रूप से सिरमौरी ताल आना पड़ रहा है। पूर्व प्रधान प्रेमा देवी ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भूमि सुधार, बाउंड्री वॉल और सुरक्षा दीवार के निर्माण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ।
वर्तमान पंचायत प्रधान सुंदर चौहान ने कहा कि आपदा के समय से ही कई रास्ते क्षतिग्रस्त हैं और भूमि सुधार का कार्य भी लंबित है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के विकास और सुरक्षा कार्यों के लिए दोबारा बजट का प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा। संवाद