पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिरमौर जिला अवैध खनन का अड्डा बनता जा रहा है। यहां अवैध खनन का काला कारोबार खूब फल-फूल रहा है। साथ लगते उत्तराखंड से हरियाणा सीमा समेत करीब 27 किलोमीटर नदी-नालों का क्षेत्र अवैध खनन को लेकर काफी संवेदनशील है।
इस क्षेत्र में अवैध खनन माफिया निरंकुश हो चुका है। वह पुलिस, खनन और वन विभाग कर्मचारियों पर जानलेवा हमले तक की हिमाकत कर रहा है। यमुना नदी में उत्तराखंड से हरियाणा तक के क्षेत्र में खनन माफिया सक्रिय है। दोनों राज्यों की सरकारों और प्रशासन का नदी की सीमांकन को लेकर गंभीर नहीं होने का फायदा खनन माफिया उठा रहा है।
रोज दर्जनों ट्रक रेत-बजरी भरकर ले उत्तराखंड ले जाए जा रहे हैं। कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गुरुद्वारा साहिब में शीश नवाते वक्त यमुना में उत्तराखंड के दर्जनों अवैध खननकारियों के ट्रैक्टर नजर आए थे। अवैध खनन का कारोबार सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है। अवैध माफिया के गुर्गे मोबाइल लेकर जगह-जगह तैनात रहते हैं। जैसे ही कोई अधिकारी या विभागीय कर्मचारी आसपास से गुजरता है तो तुरंत सूचना आगे पहुंचा दी जाती है। प्रतिदिन बाहरी राज्यों के लिए सैकड़ों ट्रक और ट्रैक्टर रेत-बजरी ले जा रहे हैं। इससे प्रदेश सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
इन क्षेत्रों में होता है खनन
पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के यमुना नदी, पांवटा यमुनाघाट, एनएच-07 पर बने यमुना पुल के समीप, भगानी, बातामंडी, बहराल, भूपपुर, कुंजा, रापुरघाट, मानपुरदेवड़ा, गिरिपुल बांगरन और नवादा अवैध खनन के लिए संवेदनशील है।
खनन माफिया के आगे सरकार और विपक्ष नतमस्तक: नाथूराम
पांवटा साहिब (सिरमौर)। एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स के स्टेट चीफ और समाजसेवी नाथू राम चौहान ने कहा कि खनन माफिया के खिलाफ प्रदेश सरकार और विपक्ष लाचार और नतमस्तक नजर आ रहा है। तीन दिनों के भीतर पुलिस, वन और खनन कर्मियों पर खनन माफिया के हमले से खतरे की घंटी बज रही है। आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया तो स्थानीय संगठन एकजुट होकर पांवटा बंद या विरोध प्रदर्शन करेंगे।