रेणुकाजी मेला : कवियों ने सामाजिक बुराइयों पर कसे खूब तंज
भाषा एवं संस्कृति विभाग ने करवाया बहुभाषीय कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुकाजी मेले में शनिवार को हुए बहुभाषीय कवि सम्मेलन में कवि एवं साहित्यकारों ने सामाजिक बुराइयों पर खूब तंज कसे।
जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से आयोजित सम्मेलन में कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से महंगाई, बेरोजगारी भ्रष्टाचार, जातिवाद सहित सामाजिक कुरीतियों पर तीखे प्रहार किए।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि प्रेमपाल आर्य ने की। जबकि मंच संचालन डॉ. ईश्वर राही ने किया। कवि सम्मेलन में जिले के करीब तीन दर्जन कवियों ने पहाड़ी, हिंदी, उर्दू व संस्कृति आदि भाषाओं में अपनी रचनाएं पढ़ीं।
अनंत आलोक ने बिल्ली रास्ता काटती होती है बदनाम, मुझको अपना काम, उसको अपना काम.., कवि प्रताप पराशर ने इतनी बात मेरी बे रखी, बेटियां तू चिटा ना चाखी... नामक पहाड़ी कविता से नशा न करने का संदेश दिया।
डॉ. ईश्वर राही ने मेला लागा रेणुका रा मारे मेले के जाणा, रेणु मंचों गाय मारे झूमियों मुजरा लाणा... गीत प्रस्तुत कर समां बांधा। सुरेंद्र सूर्या ने आमा, बाबा भोरिये भेजदि काटे और डाबे, युवा कवि अनुज कुमार ने बेशक तू कीमती था, प्रभात कुमार ने मेले में कविता लगती है ठेके पर दी जाने वाली चीज, रामकुमार सैनी ने ऑडियो हम क्यों जी पाती हैं, महज एक दो बरसात, दलीप वशिष्ट ने ओमे भाईया मजदूर, बड़े मजबूर गीत सुनाया।
अर्चना शर्मा की ओर से मिना लागी रा शौजो रा लागी री घुसारी नामक गीत, आत्माराम भारद्वाज ने ढोल बाजो दमाणु, दीपराज विश्वास ने गनीमत है कोई समझा, नरेंद्र छिंटा ने अब जमाने के गम हंसके सहते हैं हम, शिव प्रकाश पथिक ने बात-बात का हिसाब होता है, दीप चंद कौशल ने, जिन्हें था जग को जितना, गिरे हैं जमीन पर कविता सुनाई।
लायकराम भारद्वाज ने गर हार भी गए तो गम न कर, चिरानंद शास्त्री ने तू संगमर मैं गंगा का पानी, डॉ. ओम प्रकाश राही ने खीर पटांदे रे थाल और नासिर युसूफजई ने गजल और गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
इस मौके पर जिला भाषा अधिकारी कांता नेगी के अलावा कई कवि और साहित्यकार मौजूद रहे।