जिले के वरिष्ठ और नवोदित कवियों ने प्रस्तुत की बेहतरीन प्रस्तुतियां
राज्य स्तरीय यमुना शरद महोत्सव की प्रथम संध्या पर आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। राज्य स्तरीय यमुना शरद महोत्सव पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें जिलेभर के कवियों ने भाग लिया। इस दौरान वरिष्ठ और नवोदित कवियों ने बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान वीर रस, सामाजिक कुरीतियों, नारी शक्ति, आपदा के प्रभाव, नशा, ग्रामीण परिवेश, व्यंग्यात्मक व हास्य कविताओं ने लोटपोट किया। पांवटा साहिब रामलीला मैदान में आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान श्रोताओं की कमी खूब खटकती रही।
कार्यक्रम के मुख्यातिथि वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुमार शर्मा, विशिष्ट अतिथि नाहन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विभव कुमार शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा, नगर परिषद अध्यक्ष निर्मल कौर, उपाध्यक्ष ओपी कटारिया, हिमोत्कर्ष संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद तिवारी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य अजय शर्मा व कैप्टन पीसी भंडारी विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन जीवन प्रकाश जोशी ने किया।
कवि सम्मेलन के आगाज पर सबसे पहले नवोदित कवयित्री वर्षा चौहान ने मैंं भारत की नारी हूं, मत बांधों मेरे पैरों में बेडिय़ां, मैं सभी परंपराओं रुढिय़ों को तोड़ना चाहती हूं। पारस ने राम तेरी माया कोई जान ही नहीं पाया। वरिष्ठ कवयित्री सावित्री तिवारी आजमी ने मां यमुना ने कहा तट मेरा सजाना चाहिए। प्रो. देविंद्रा गुप्ता, डॉ. जयचंद शर्मा, रेणु गोस्वामी, प्रतिभा पांडे, सरला शर्मा, नीलाक्षी पुंडीर, बिंदू शर्मा, जीवन जोशी, अर्चना शर्मा, हेमराज राणा, शिव प्रकाश पथिक, गरिमा जोशी, गौरव, दीपराज, कमल पांडे और एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा ने भी कविता पाठ किया।
विनोद सैनी ने व्यंग्य रचना में कहा कि अब डर नहीं किसी तो लगता दाग, सर्फ एक्सेल है न। एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि यमुना शरद महोत्सव का आगाज कवि सम्मेलन से किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कवि बोले मन की व्यथा, पर सुनने वाला कौन? शब्दों का मोल घट गया रह गया केवल शोर। एसडीएम ने कहा कि कवि सम्मेलन का एक नेक उद्देश्य रहा है। कवियों को बेहतर मंच व प्रोत्साहन देने का प्रयास किया गया है।
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