डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन से जारी किया गया फरमान
अस्पताल में विशेषज्ञ रेडियोथैरेपी सेवारत नहीं होने का बनाया कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में कीमोथैरेपी सेवाओं के बंद किए जाने का फरमान जारी हो गया है। प्रिंसिपल डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन से निर्देश जारी कर दिए गए है।
अस्पताल में विशेषज्ञ रेडियोथैरेपी सेवारत नहीं होने के चलते ये कदम उठाने की बात कही गई है। एक वर्ष से स्थानीय अस्पताल में कीमोथैरेपी सेवाएं मिलना शुरू हुई हैं। अब ये सेवा बंद करने के निर्देश जारी होने पर पांवटा साहिब तथा शिलाई क्षेत्र के मरीजों और तीमारदारों में भारी रोष व्याप्त है।
बता दें कि सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में डे केयर सेंटर में कीमोथैरेपी सेवाएं शुरू करने से पहले स्थानीय वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. पीयूष तिवारी को फरीदाबाद से एक माह की फैलोशिप करवाई गई है। कीमोथैरेपी कैंसर के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनपद के दर्जनों मरीजों को इस तरह के उपचार के लिए पहले पीजीआई चंड़ीगढ़ या आईजीएमसी शिमला जाना होता था। इससे भारी आर्थिक चपत लगती है, क्योंकि मरीज को एक दिन पहले अस्पताल जाना होता है, इसके बाद नंबर आने पर अगले दिन कीमोथैरेपी के बाद तीसरे या चौथे दिन वापस पहुंचते हैं। मरीज के साथ तीमारदार रहता है। जो काफी महंगा उपचार साबित हो जाता है।
प्रशिक्षित चिकित्सक के होने पर पिछले वर्ष से शिलाई, पांवटा साहिब क्षेत्र के अब तक डेढ़ दर्जन मरीजों को उपचार पांवटा में ही हो पा रहा है। अब अचानक स्थानीय अस्पताल में इस तरह की सुविधाएं बंद करने के निर्देश जारी हुए हैं। इसके बंद होने से अपने घर के समीप ही मरीजों का कीमोथैरेपी इलाज रुक जाएगा। यह सेवा बंद होने से मरीजों को निजी अस्पतालों या बड़े शहरों का रुख करना पड़ेगा, जो उनके लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ेगा और उपचार में बाधा उत्पन्न करेगा।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय चयनित प्रतिनिधि व प्रशासन बेहतर कीमोथैरेपी की पांवटा अस्पताल में व्यवस्था जारी रखने को जरूरी कदम उठाएं। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब के कार्यवाहक प्रभारी डॉ. एवी राघव ने प्रिंसिपल डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन से पत्र प्राप्त होने की पुष्टि की है।
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पहले की तरह ही जारी रहे सेवाएं : सुखराम चौधरी
पूर्व ऊर्जा मंत्री और स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी ने बताया कि सिविल अस्पताल में कीमोथैरेपी सेवाएं पहले की तरह जारी रखी जाएं। मरीजों को ऐसे में इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या आईजीएमसी शिमला जाना पड़ेगा या फिर निजी अस्पतालों में जाना पड़ेगा जो बहुत महंगा है और आम आदमी के बस की बात नहीं है। इस सुविधा को बंद किया गया तो इसका विरोध होगा। इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री हिमाचल प्रदेश से भी बात की जाएगी।
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