-चिकित्सकों की सलाह, हर्बल रंगों से खेलें होली, केमिकल रंगों से रखें दूरी
-आंखों और त्वचा को हो सकता है नुकसान, नारियल तेल लगाने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। रंगों का त्योहार होली इस वर्ष 4 मार्च को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, पक्के रंगों और आकर्षक पिचकारियों से सज चुके हैं। हालांकि चिकित्सकों ने रासायनिक रंगों के प्रयोग को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि केमिकल युक्त रंग त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार कौशिक ने बताया कि होली के दौरान हर्बल और सूखे गुलाल का प्रयोग करना अधिक सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाले कई रंगों में हानिकारक रसायन मिले होते हैं, जिनसे त्वचा पर एलर्जी, खुजली, दाने और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेष रूप से बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि रंग खेलने से पहले शरीर और बालों पर नारियल तेल या मॉइस्चराइजर लगा लें, ताकि रंग सीधे त्वचा के संपर्क में न आए। रंग खेलने के बाद गुनगुने पानी से त्वचा को हल्के साबुन से साफ करें और त्वचा को रगड़ने से बचें।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की एचओडी डॉ. शालू गुप्ता ने कहा कि होली के दौरान सबसे अधिक खतरा आंखों को रहता है। पानी के गुब्बारे या रंग सीधे आंखों में जाने से कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है। बच्चों को विशेष रूप से समझाएं कि वे किसी के चेहरे या आंखों पर जबरन रंग न डालें। उन्होंने कहा कि यदि आंखों में रंग चला जाए तो तुरंत साफ और ठंडे पानी से आंखों को धोना चाहिए। जलन या धुंधलापन अधिक होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। आंखों को रगड़ने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
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हिम ईरा केंद्रों पर मिल रहे हर्बल रंग
जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित हिम ईरा केंद्रों पर हर्बल रंग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नाहन, आमवाला सैनवाला, नेहलीधाड़ी, शी-हाट, त्रिलोकपुर और रेणुकाजी सहित विभिन्न खंडों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ये रंग बेचे जा रहे हैं। ये हर्बल रंग फूलों, चुकंदर और अरारोट के मिश्रण से तैयार किए गए हैं, जो त्वचा के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं। प्रशासन और चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि इस बार सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होली मनाएं और हर्बल रंगों को प्राथमिकता दें।
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